रायगढ़. रायगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर चक्रधर समारोह को कोरोनाकाल से लेकर अब तक जैसे ग्रहण सा लग गया है। किसी साल प्रशासन को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा तो कभी वर्चुअल प्रोग्राम के भरोसे इस भव्य समारोह की इतिश्री कर ली गई। कई सालों के अंतराल के बाद इस बार ऐसे संयोग बने कि इस समारोह को उसी पुरानी भव्यता और गरीमा के साथ मनाने का निर्णय लिया गया जिसके बाद अंचल के कला प्रेमियों को काफी उम्मीदें जगी थी मगर विडंबना ही है कि इस बार का चक्रधर समारोह भी रिपिट कलाकारों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। जिससे दर्शकों व श्रोताओं के मन में निराशा है।
रायगढ़ के ऐतिहासिक चक्रधर समारोह के भव्य आयोजन में हमेशा से उद्घाटन के दिन और अंतिम दिवस देश के नामचीन कलाकारों को देखने सुनने का यहां के नागरिकों को मौका मिलता है। मगर इस बार का चक्रधर समारोह रीपिट कलाकारों की उपस्थिति से सजने के कारण यह कार्यक्रम फीका-फीका नजर आने लगा है। यही नही बीच के 8 दिनों मंे भी कई कलाकारों को जगह दी गई जो पहले भी इस मंच की शोभा बढ़ा चुके हैं। इनमें से कुछ कलाकार तो एक से अधिक बार इस मंच पर अपनी प्रस्तुती दे चुके हैं। नामचीन कलाकारों में हेमा मालिनी और डाॅ. कुमार विश्वास पहले भी रायगढ आ चुके हैं और कार्यक्रम की प्रस्तुती दे चुके हैं। इन रिपिट कलाकारों को अगर छोड़ दे तो आयोजन में स्थानीय प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों का संगम करके कार्यक्रम को क्रमवार व्यवस्थित करने का प्रयास अवश्य हुआ है मगर इसके बावजूद रायगढ़ के प्रगतिशील नाट्यविधा, ईप्टा, गुडी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोकगीत व लोक संगीत को करीब-करीब दरकिनार कर दिया गया है। कुछ कलाकारों को यदि स्थान मिला भी है तो ऐसा लगता है कि इनमें राजनैतिक प्रतिबद्वता अधिक और कलाकारों की अपनी शाख कम ही नजर आती है।
सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि हमारे जिले से ही लगे पड़ोसी प्रांत ओडिसा की एक समृदृशाली और गौरवपूर्ण सांस्कृतिक विरासत रही है जिस कला को न केवल ओडिसा या अन्य प्रांत बल्कि विदेशों में भी एक शास पहचान बनी है। आडिसा के कई कलाकारों ने अपने कला का जलवा कई देशों में न केवल बिखेरा है बल्कि देश विदेश में काफी नाम भी कमाया है इनमें खासकर पश्चिम ओडिसा का संबलपुरी लोकनृत्य, फोक संगीत और फोक डांस की अपनी एक अलग पहचान है मगर हमारे समिति के सदस्यों को शायद पश्चिम ओडिसा के कलाकारों की इस कला में कोई रूचि नही है इसलिये उन्होंने दिवसीय कार्यक्रम में भी केवल ओडिसा को ही तरजीह दी है। दरअसल ओडिसा नृत्य का विरोध नही है मगर पिछले कुछ सालों से हमारे पड़ोसी प्रांत के अन्य कलाकारों विशेषकर पश्चिम ओडिसा की समृद्ध कलाओं की अनदेखी करना कहां तक सही है। जबकि हमारी भाषा, बोली, नृत्य विधा और अन्य कलाएं भी पश्चिमम ओडिसा के कलाओं से न केवल मिलती जुलती है बल्कि समृद्ध भी हुई है। यही नही हमारे रायगढ़ में ही ओडिसा समाज का एक बडा वर्ग निवास करता है और पड़ोसी प्रांत से हमारी सांस्कृतिक विरासत रियासतकालीन समय से साझा होती रही है।
कुल मिलाकर इस बार के दस दिवसीय आयोजन में कुछ नये कलाकारों को छोड़कर कुछ भी खास नही होगा जिसकी रायगढ़ की कलाप्रिय जनता एक साल तक टकटकी लगाकर इस गणेश उत्सव की बाट जोहती है। इस पूरी सूची में आयोजन समिति की समारोह की भव्यता को लेकर प्रतिबद्धता कम और प्रशासनिक बाध्यता की छटपटाहट अधिक नजर आती है।
इस बार के 10 दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा
इस बार रायगढ़ के ऐतिहासिक चक्रधर समारोह के लिये तय कार्यक्रम के अनुसार प्रथम दिवस 07 सितंबर को पद्मश्री रामलाल का सम्मान, इसके बाद भूपेन्द्र बरेठ व टीम की कथक प्रस्तुती तत्पश्चात फिल्मी अभिनेत्री हेमा मालिनी द्वारा राधा रास बिहारी पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 08 सितंबर को बाजीराव भोपाल का शास्त्रीय गायन, सौगत गांगुली का सरोदवादन, दीपानिता सरकार दिल्ली का कथक तत्पश्चात पद्मश्री रंजना गौहार का ओडिशी नृत्य, 09 सितंबर को भुवनेश्वर की टीम द्वारा रामायण व ओडिशी पर आधारित त्रिधारा कार्यक्रम, जीतू शंकर का तबला संतुर व सितार पर फ्यूजन वादन, इसके बाद चांद अफजल कादरी गु्रप की कव्वाली, 10 सितंबर को राकेश चैरसिया का बांसुरी वादन, बासंती व ज्योतिश्री वैष्णव रायगढ़ का कथक, तफसिर अहमद रायपुर का एकाडियन वादन, तत्पश्चात प्रभजन चतुर्वेदी रायपुर का गजल गायन, 11 सितंबर को अनुष्का सोनी का जबलपुर का सितार वादन, राकेश शर्मा रायगढ़ का गायन, उपासना भास्कर लखनउ का कथक और उसके बाद प्रसिद्ध सिनेतारिका मीनाक्षी शेषाद्री का भरत नाट्यम कार्यक्रम प्रस्तुत होगा। 12 सितंबर को आरती सिंह रायपुर का रीतु डांस, मशहूर संतुर वादक शिव कुमार के पुत्र राहुल शर्मा व छन्नु मिश्रा के बेटे रामकुमार मिश्रा के बीच संतुर व तबला पर जुगल बंदी प्रस्तुत की जाएगी, तत्पश्चात रथीस बाबू भिलाई के द्वारा भरत नाट्यम द्वारा कुच्चीपुडी की प्रस्तुती, 13 सितंबर को भद्रा सिन्हा व गायत्री शर्मा दिल्ली का भरत नाट्यम, लकी मोहंती कटक का ओडिशी, सुश्री विखा प्रदीप, कोचिन गु्रप का मोहिनी अट्टम, भारती बंधु रायपुर का भक्तिगायन, 14 सितंबर को विनोद मिश्रा का शास्त्रीय गायन, कृष्ण भद्रा नंबोदरी मुंबई का भरतनाट्यम, पौशाली चटर्जी, गुवाहाटी का मणिपुर डांस, डाॅ रघुपत रूणी श्रीकांत गु्रप विशाखापटनम गु्रप का कुच्चीपुडी, 15 सितंबर को प्रदीप चैबे रायपुर का शास्त्रीय गायन, माया कुलश्रेष्ठ दिल्ली का कथक, फ्रेच स्कूल के कलाकार पद्मश्री देवयानी का भरत नाट्यम, इसके बाद पद्मश्री अनुज शर्मा एण्ड टीम के द्वारा छत्तीसगढ़ी गायन की प्रस्तुती दी जाएगी। 16 सितंबर को समारोह के अंतिम दिवस मानसी दताओं गू्रप गुवाहाटी असम के द्वारा बिहू लोकनृत्य की प्रस्तुती के बाद देश के मशहूर कवि डाॅ कुमार विश्वास, सुरेन्द्र शर्मा एण्ड गु्रप के द्वारा कवि सम्मेलन का मंचन किया जाएगा।
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