भाटापारा। अगर आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं और आपके पास 10 से 20 रुपये की चिल्हर नहीं है, तो सफर आपके लिए शर्मिंदगी भरा हो सकता है। स्टेशन से ट्रेन छूटते ही थर्ड जेंडर का एक समूह कुछ ही मिनटों में डिब्बे में चढ़कर यात्रियों से जबरन पैसे वसूलने लगता है। खास बात यह है कि अगर कोई यात्री पैसे देने से इनकार करता है, तो उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाता है।
थर्ड जेंडर के इस तरह के व्यवहार से महिलाएं, बुजुर्ग और युवा यात्री सभी असहज महसूस करते हैं, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनकी शिकायत करने पर भी GRP और RPF कोई कार्रवाई नहीं करते। यात्रियों की मानें तो शिकायत करने पर अधिकारी अनसुना कर देते हैं या ठोस कार्रवाई से बचते हैं।
सूत्रों की मानें तो इस अवैध वसूली के पीछे एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें कुछ लोग थर्ड जेंडर के वसूले गए पैसों में से हिस्सा भी लेते हैं।
रेल यात्रियों का कहना है कि अगर रेलवे प्रशासन ने इस पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो आम यात्रियों के लिए ट्रेनों में सफर करना और भी तनावपूर्ण हो जाएगा। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन और स्थानीय सुरक्षा बलों से मांग की है कि इस अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
रेल प्रशासन की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
सवाल ये है कि जब यह गतिविधियां नियमित रूप से हो रही हैं, तो रेलवे सुरक्षा बल और प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ती? क्या यह उनकी मिलीभगत का संकेत है या महज लापरवाही?
यात्रियों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना रेलवे प्रशासन और सुरक्षाबलों की जिम्मेदारी है। यदि यह जिम्मेदारी भी निजी विवेक पर छोड़ दी गई, तो ‘यात्री पहले’ का नारा केवल दिखावा बनकर रह जाएगा।
