रायगढ़ में अपहरण की सूचना के महज 8 घंटे के भीतर अपहृत बालक अपहरणकर्ता के चंगुल से सकुशल बरामद, मुख्य आरोपी सहित दो साथी भी गिरफ्तार

by Kakajee News

25 लाख रूपए की फिरौती मांगने की थी तैयारी


विशेष सहयोग के लिये झारखंड पुलिस विशेषकर खूंटी पुलिस को प्रेषित किया जाएगा प्रशस्ति पत्र व नगद ईनाम


रायगढ़। रायगढ़ जिले की पुलिस के नाम आज एक बड़ी सफलता हाथ लगने से प्रदेश के गृह मंत्री सहित पुलिस महानिरीक्षक ने बिलासपुर संभाग आईजी तथा रायगढ़ पुलिस अधीक्षक सहित झारखण्ड के तीन जिलों की पुलिस के अलावा रायगढ़ पुलिस टीम की पीठ थपथपाई है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार काम से निकाले जाने के खुन्नस और शीघ्र लखपति बनने के इरादे से जांजगीर बाराद्वार निवासी खिलावन महंत खरसिया क्षेत्र के व्यापारी के 6 वर्षीय बालक शिवांश अग्रवाल का अपने साथियों के साथ अपहरण कर अपने षड्यंत्र अनुसार बालक को झारखंड के पेशेवर गिरोह को सुपुर्द करने के लिये उनके सम्पर्क में थे , उनकी आगे की प्लालिंग अपहृत बालक के परिजनों से 25 लाख रुपए फिरौती की डिमांड करने की भी थी, जिनके इरादों पर पानी फेरते हुए रायगढ़ पुलिस, झारखंड पुलिस की मदद से घटना की सूचना के महज 8 घंटे के भीतर च्च्ऑपरेशन शिवांशज्ज् चलाकर आरोपियों के कब्जे से बालक की सकुशल बरामदगी की गई है। पुलिस कप्तान संतोष सिंह ने लगातार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के साथ मिलकर संभाग आईजी रतनलाल डांगी के दिशा निर्देश पर अपराधियों तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। इस मामले में रायगढ़ पुलिस टीम को झारखण्ड के तीन जिलों के पुलिस अधीक्षकों के अलावा वहां की पुलिस की भी भरपूर मदद मिली जिसके चलते मात्र 8 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी सहित उसके दो साथी पुलिस गिरफ्त में आए और अपहृत बालक शिवांग सकुशल बरामद हुआ।
पुलिस विभाग की जानकारी के अनुसार कल 20 फरवरी की शाम-रात पुलिस चौकी खरसिया में व्यवसायी रमेश कुमार अग्रवाल ( उम्र ६४ वर्ष) निवासी छपरीगंज खरसिया उनके घर में रसोईया का काम करने वाले निखिल महंत उर्फ खिलावन पिता एतवारी महंत २८ साल निवासी सरवानी बाराद्वार जिला जांजगीर चांपा द्वारा उसके ०६ वर्षीय पोते शिवांश अग्रवाल पिता राहुल अग्रवाल को बिना बताये मोटर सायकल में बिठाकर कहीं ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराया । रिपोर्टकर्ता बताया कि निखिल महंत को कुक के काम पर रखे थे, आवश्यकता नहीं होने पर 18 फरवरी को उसका बाकी रूपया पैसा दिये तो वह चला गया था । 20 फरवरी को निखिल महंत इनके घर आया और मोबाईल चार्जर उपर कमरा में छूट गया है कहकर उपर कमरे में गया और नीचे आकर शिवांश को बुलाकर चलो चिप्स दुंगा कहकर शाम करीब साढ़े 5 बजे अपने साथ मो.सा. में बिठाकर ले गया करीब साढ़े 7 बजे तक वापस नहीं आने पर बालक की खोजबिन किये और अनहोनी की अंदेशा भांप कर पुलिस चौकी खरसिया में सूचना दिये । खरसिया पुलिस संदेही निखिल महंत पर धारा 364 -ए भादवि दर्ज कर विवेचना में लिया गया ।
वहीं घटना की सूचना मिलते ही रायगढ़ एसपी संतोष सिंह जिले में नाकेबंदी का पांइट देकर तुरंत खरसिया चौकी पहुंचे । एडिशनल एसपी अभिषेक वर्मा को रायगढ़ मुख्यालय में सायबर टीम के साथ संदेही का लोकेशन ट्रेश करने व सीमावर्ती जिलों के थाना प्रभारियों से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपे। एसडीओपी खरसिया पितांबर पटेल को अनुविभाग के अलग-अलग अधिकारियों की टीम बनाकर जांच में मिली जानकारी के अनुसार शीघ्र अलग-अलग दिशाओं में टीम रवाना किये। घटना की सूचना पाकर रात ही में बिलासपुर आईजी रतनलाल डांगी खरसिया पहुंचे व मामले की पूरी जानकारी लेकर अधिकारियों को महत्तवपूर्ण दिशा निर्देश दिए। डीजीपी डी एम अवस्थी द्वारा मामलें में आवश्यक निर्देश दिए जाते रहे। रायगढ़ एसपी द्वारा बनाई गई टीमों में चौकी प्रभारी खरसिया के हमराह में स्टाफ मुख्य संदेही खिलावन महंत के गृहग्राम बाराद्वार एवं पामगढ़ की ओर रवाना किया गया। एडिशनल एसपी रायगढ़ से मिल रही जानकारी व क्लू के आधार पर दो इंस्पेक्टर को घन्टें भर के अंदर रायगढ़-झारखंड के रास्ते रवाना किया गया। एसडीओपी खरसिया के साथ अन्य स्टाफ संदेही के लोकल संपर्क सूत्रों के यहां लगातार छापेमारी की जा रही थी। तभी आरोपियों के सुनियोजित तरीके से घटना को अंजाम देने की जानकारी सामने आई। शातिर आरोपीगण पुलिस की नाकेबंदी के रास्तों को जानते हुए मुख्य मार्ग को छोड़ते हुए पहाड़ी व अंदरूनी रास्तों का प्रयोग करते बम्हनीनडीह- नंदेली- तारापुर अमलीभौना होते हुए रायगढ़ की सीमा पार करने की जानकारी मिली। जबकि खरसिया में संदेही अपने परिचितों को बिहार जाने की बात बताया था ताकि पुलिस बिहार की ओर टीम रवाना करें यही नहीं संदेही खिलावन महंत बालक को घर से मोटरसाइकिल में बिठा कर ले गया था। सीसीटीवी फुटेज में भी वह बाइक में दिखा परन्तु अपने साथियों के साथ अपनी पूर्व प्लानिंग अनुसार खिलावन महंत पुलिस को चकमा देने बाइक से निकला और रास्ते में बाइक छोड़ अपने दो साथी अमर दास महंत व संजय सिदार (ड्राइवर) जो किराये की अर्टिगा कार के साथ रास्ते में उसका इंतजार कर रहे थे, उनसे मिला। अब तीनों आरोपी बालक को कार में बिठाकर झारखंड रवाना हुये, वे इस घटना में अपने को सुरक्षित रखने झारखंड के पेशेवर अपहरण गिरोह को सौंपने के लिये सम्पर्क कर रहे थे, उसके बाद आरोपियों की योजना बालक के पिता से 25 लाख रूपये की डिमांड करने की थी ।
एसपी रायगढ़ सभी पहलुओं को बारीकी से जांच कर आरोपियों के बिहार, झारखंड, उड़ीसा जाने की संभावना को देखते हुए इन राज्यों की पुलिस से कोऑर्डिनेट कर इन राज्यों की पुलिस के अलर्ट कर संदेहियों का डिटेल शेयर किया गया व नाकेबंदी का अनुरोध किये जिनसे काफी मदद मिली। झारखंड के सभी संबंधित एसपी से लगातार संपर्क करते रहें व रायगढ़ की पीछा करने वाली टीम को निर्देशित किया। इसी बीच आरोपियों के अर्टिगा कार से खूंटी झारखंड की ओर जाने की जानकारी मिली। खरसिया से रवाना हुई। टीम ने आखिरकार झारखण्ड के खूंटी जिले से आरोपियों को दबोचन में बड़ी कामयाबी हासिल की।

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