जुनवानी में गैर-वर्णनात्मक नर बकरों का बधियाकरण, पशुधन नस्ल सुधार की दिशा में अहम पहल, प्रजनन नियंत्रण व आय वृद्धि पर दिया गया जोर, वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी जानकारी

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रायगढ़ । कृषि विज्ञान केंद्र, रायगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. राजपूत के मार्गदर्शन में विकासखंड रायगढ़ के ग्राम-जुनवानी में निकरा परियोजना के अंतर्गत गैर-वर्णनात्मक नर बकरों का बधियाकरण कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, रायगढ़ एवं पशुपालन विभाग, रायगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस दौरान 10 गैर-वर्णनात्मक नर बकरों का वैज्ञानिक विधि से बधियाकरण किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अवांछित प्रजनन पर नियंत्रण, पशुधन की नस्ल गुणवत्ता में सुधार तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि करना रहा। इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सी.पी.एस. सोलंकी ने बधियाकरण के दौरान अपनाई जाने वाली स्वच्छता, उपयुक्त आय का चयन एवं पश्च-प्रबंधन संबंधी आवश्यक सावधानियों की विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. के.एल.पटेल ने बकरी पालन में बधियाकरण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इसे सुरक्षित प्रबंधन, प्रजनन नियंत्रण एवं उत्पादन क्षमता वृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी उपाय बताया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अनुसंधान सहायक श्री मनोज कुमार साहू ने पोषण प्रबंधन, उन्नत नस्लों के महत्व तथा बधियाकरण के माध्यम से नस्ल सुधार को किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक बताया।
इस दौरान तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा पशुपालकों को वैज्ञानिक बकरी पालन, संतुलित आहार, रोग नियंत्रण एवं आधुनिक प्रबंधन तकनीकों की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने इसे पशुधन विकास की दिशा में उपयोगी एवं लाभकारी पहल बताते हुए कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़ एवं पशुपालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

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Author: kakajee

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