सारंगढ़- बिलाईगढ़। कानून व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए जब एक पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए स्वयं तहसीलदार को कोतवाली थाना के मुख्य गेट पर अनशन पर बैठना पड़ा। यह दृश्य किसी आंदोलन का नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता का जीवंत प्रमाण बन गया। प्रकरण सारंगढ़ कोतवाली थाना से जुड़ा है, जहाँ मारपीट के एक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं किए जाने से नाराज़ होकर तहसीलदार वन्दे राम भगत को अनशन का सहारा लेना पड़ा। बताया जा रहा है कि पीड़ित युवक द्वारा दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थान पर मारपीट की लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकारी अधिकारी की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम नागरिक, गरीब, मजदूर और महिलाओं की सुनवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है।तहसीलदार का अनशन सीधे तौर पर कोतवाली थाना की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है। घटना की जानकारी मिलते ही थाना परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। चर्चा का विषय यह रहा कि यदि तहसीलदार जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी को न्याय के लिए अनशन करना पड़े, तो यह पूरे सिस्टम के लिए शर्मनाक स्थिति है। अब मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है। जनता की निगाहें इस पर टिकी हैं कि पीड़ित की रिपोर्ट कब दर्ज होगी। यह घटना केवल एक शिकायत की नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन के बीच बिगड़ते तालमेल और आमजन के भरोसे के टूटने की कहानी है। बहरहाल अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इससे सबक लेता है या फिर यह अनशन व्यवस्था पर लगे एक और दाग के रूप में दर्ज हो जाएगा।
