फ्लैग—डे पर लहराया तिरंगा, गर्व के साथ याद किया गया राष्ट्रध्वज की आजादी का संघर्ष

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— रायगढ़ से ही जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने शुरू किया था संघर्ष
— एक दशक चले कानूनी संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला

रायगढ़. “यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि हर भारतीय को गर्व और सम्मान के साथ तिरंगा फहराने का अधिकार दिलाने की लड़ाई, या कहें कि तिरंगे की आजादी का कानूनी संघर्ष रायगढ़ की इस पुण्यधरा से ही शुरू हुआ था। आज देश का कोई भी नागरिक गर्व के क्षण में पूरी आजादी से तिरंगा फहरा सकता है, इसमें कहीं न कहीं रायगढ़ की इस धरती और जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल का भी योगदान शामिल है।” उक्त उद्गार जिंदल स्टील लिमिटेड, रायगढ़ के कार्यपालन निदेशक सब्यसाची बंद्योपाध्याय ने व्यक्त किए। वे फ्लैग—डे के अवसर पर संयंत्र में आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे।

23 जनवरी, 2004 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से हर भारतीय नागरिक को सम्मान और मर्यादा के साथ तिरंगा फहराने का मौलिक अधिकार हासिल हुआ। देश के नागरिकों को यह अधिकार दिलाने के लिए जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने एक दशक से भी अधिक समय तक कानूनी संघर्ष किया। इस ऐतिहासिक दिन को और भी यादगार बनाने के लिए हर साल 23 जनवरी को फ्लैग—डे के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष फ्लैग—डे के अवसर पर आयोजित अनेक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मुख्य समारोह जिंदल सेंटर, रायगढ़ के परिसर में आयोजित किया गया। इसमें सबसे पहले मुख्य अतिथि सब्यसाची बंद्योपाध्याय ने तिरंगा फहराया। फिर राष्ट्रगान के बाद सुरक्षाकर्मियों और डॉग स्क्वाड ने मार्चपास्ट किया। समारोह में श्री बंद्योपाध्याय ने कहा कि “फ्लैग—डे सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि यह उस विचार, उस संघर्ष और उस संकल्प का प्रतीक है, जिसने हर भारतीय को अपने तिरंगे को सम्मान के साथ फहराने का अधिकार दिलाया।”
“तिरंगा केवल एक झंडा नहीं है। यह हमारी पहचान है, हमारा स्वाभिमान है, और हमारे करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। आज जब हम गर्व से तिरंगा फहरा रहे हैं, तो हमें यह भी याद रखना चाहिए कि एक समय ऐसा भी था जब देश की आजादी के बाद भी आम भारतीय को अपने घर, अपने संस्थान, या अपने परिसर में तिरंगा फहराने का अधिकार नहीं था। यह अधिकार देश के नागरिकों को आसानी से नहीं मिला, बल्कि इसके पीछे एक लंबा कानूनी और वैचारिक संघर्ष रहा है।”
उन्होंने बताया कि “अमेरिका की यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्सास में पढ़ाई के दौरान छात्र परिषद के अध्यक्ष के तौर पर श्री जिंदल हर रोज गर्व के साथ तिरंगा फहराते थे। पढ़ाई के बाद भारत लौटने के बाद उन्होंने रायगढ़ के अपने संयंत्र में भी सम्मान से तिरंगा फहराया, लेकिन प्रशासन ने इसे नियमों का उल्लंघन माना। श्री जिंदल को विश्वास था कि अगर हम स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं, तो तिरंगा फहराना हमारा मौलिक अधिकार होना चाहिए। इसी विश्वास के साथ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सरकार और व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी। आखिरकार, 23 जनवरी 2004 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि तिरंगा फहराना भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार है और देश का हर नागरिक सम्मान के साथ तिरंगा फहरा सकता है।”
उन्होंने कहा कि “जिंदल स्टील लिमिटेड सिर्फ एक उद्योग नहीं है। यह राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने वाला ऐसा संस्थान है, जहां हम सिर्फ स्टील नहीं बनाते, बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाते हैं, रोजगार के अवसर सृजित करते हैं और देश की आर्थिक प्रगति में अपना योगदान देते हैं। तिरंगे से प्रेरणा लेकर हम सभी को अपने—अपने क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना चाहिए। श्री बंद्योपाध्याय ने कहा कि देश में कहीं भी तिरंगे को लहराते हुए देखें, तो गर्व से कहें कि हम उस संस्थान, उस शहर और उस राज्य से जुड़े हुए हैं, जहां से तिरंगे की आजादी की लड़ाई शुरू हुई।”

पुराने और क्षतिग्रस्त झंडों के सम्मानपूर्वक निस्तारण के लिए देश में शुरू होगा अभियान : नवीन जिंदल

फ्लैग—डे के अवसर पर जारी अपने संदेश में लोकसभा सांसद, फ्लैग फाउंडेशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष और जिंदल स्टील लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने अपने संदेश में कहा कि 23 जनवरी का यह दिन इसलिए विशेष है कि आज हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाते हैं। इसी दिन वर्ष 2004 में हर भारतीय को तिरंगा फहराने का अधिकार भी मिला था। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रध्वज को सम्मान के साथ फहराना, हमारी अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है और हर भारतीय का मौलिक अधिकार है, जो हमें संविधान से मिलता है। इससे पहले वर्ष 1995 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि सम्मान के साथ तिरंगा फहराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि केंद्र सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई और यह कानूनी लड़ाई लगभग 8 वर्षों तक चली। 1994 से चली यह यात्रा सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं थी, बल्कि तिरंगे को हर भारतीय के जीवन का हिस्सा बनाने की एक ऐतिहासिक यात्रा थी। इस अधिकार के बाद अगला संकल्प तिरंगे को हर भारतीय तक पहुंचाने का था। इसके लिए फ्लैग फाउंडेशन आॅफ इंडिया की स्थापना की गयी। इस संस्था के माध्यम से आज तक देशभर में 200 विशाल ध्वज स्थापित किए जा चुके हैं। इससे प्रेरणा लेकर अन्य लोगोें ने भी करीब 500 विशाल ध्वज स्थापित किए। कुल मिलाकर आज भारत में 700 से अधिक स्थानों पर विशाल ध्वज लहरा रहे हैं, जो विश्व में किसी भी देश के मुकाबले कहीं अधिक है। अब पुराने और क्षतिग्रस्त झंडों का सम्मानपूर्वक निस्तारण और पुर्नचक्रण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने का समय आ गया है। इसके लिए फ्लैग फाउंडेशन आॅफ इंडिया विभिन्न संस्थाओं से मिलकर पुराने तिरंगों को रि—साइकिल करने का अभियान शुरू कर रही है। मैं सभी भारतीयों, संस्थाओं और एनजीओ से आग्रह करता हूं कि तिरंगा फहराने के साथ ही उसका सम्मान बनाए रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आइए, 23 जनवरी को नेशनल फ्लैग—डे के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहयोग करें और संकल्प लें कि तिरंगे को सिर्फ गर्व से फहराएंगे ही नहीं, बल्कि हर अवस्था में उसके सम्मान की रक्षा भी करेंगे।
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Author: kakajee

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