8 ग्रामों का ऐतिहासिक संघर्ष तेज: मुआवजा-पुनर्वास नहीं तो रायपुर से दिल्ली तक गूंजेगी लड़ाई , जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष उस्मान बेग दिनभर धरने में डटे

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रायगढ़/ घरघोड़ा। एनटीपीसी तिलाई पाली परियोजना से प्रभावित 8 ग्रामों के ग्रामीणों का आंदोलन अब ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। भूमि मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और सम्मानजनक भविष्य की मांग को लेकर आठ ग्राम के ग्रामीण पिछले 14 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर डटे हुए हैं, लेकिन शासन-प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन की चुप्पी ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और असंतोष की लहर पैदा कर दी है।

जिला युवा कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष उस्मान बेग इस मुद्दे पर पिछले 15 दिनों से ग्राम वाशियों के साथ सक्रिय है
इसी गंभीर मुद्दे को लेकर क्षेत्र के प्रमुख ग्रामीणों ने उस्मान बेग के साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं खरसिया विधायक माननीय उमेश पटेल तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा धर्मजयगढ़ विधायक माननीय लालजीत सिंह राठिया को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की थी। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने ग्रामीणों की मांगों को पूरी तरह जायज बताते हुए उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया और आंदोलन को मजबूती देने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिनियम 2013 के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद उन्हें उचित भूमि मुआवजा नहीं दिया गया, पुनर्वास की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से लागू नहीं की गई और अनुसूचित क्षेत्र में पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं की सहमति जैसे आवश्यक नियमों की भी अनदेखी की गई। कई बार ज्ञापन, आवेदन और निवेदन के बावजूद प्रशासन और प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
आज दोनों वरिष्ठ नेताओं के निर्देश और ग्रामवासियों के बुलावे पर जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष उस्मान बेग धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने दिनभर ग्रामीणों के बीच बैठकर आंदोलन को खुला समर्थन दिया, पीड़ित परिवारों की समस्याएं सुनीं और आंदोलन की आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
ग्रामीणों की 8 सूत्रीय प्रमुख मांगों में अधिनियम 2013 के अनुसार उचित भूमि मुआवजा, पारदर्शी और न्यायपूर्ण पुनर्वास नीति, प्रत्येक प्रभावित परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा, युवाओं को स्थायी रोजगार या बेरोजगारी भत्ता, अनुसूचित क्षेत्र में पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति, कट-ऑफ तिथि में सुधार, किसानों से ली गई गलत सहमतियों को निरस्त करना तथा मुआवजे में हुई अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच शामिल है।
धरना स्थल से उस्मान बेग ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा कि 14 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की अनदेखी करना शासन-प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन की संवेदनहीनता और हठधर्मिता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल मुआवजे की लड़ाई नहीं, बल्कि गरीब, किसान, आदिवासी और मजदूर परिवारों के हक, सम्मान और भविष्य की लड़ाई है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन घरघोड़ा एसडीएम कार्यालय से कलेक्ट्रेट, रायपुर होते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद भवन तक ले जाया जाएगा।
“ वही उस्मान ने कहा कि ग्रामों की यह लड़ाई अब पूरे प्रदेश और देश की आवाज बनेगी। जब तक हर प्रभावित परिवार को उसका हक और सम्मान नहीं मिलता, तब तक यह संघर्ष रुकेगा नहीं। इस आंदोलन को अंतिम मंजिल तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी मैं स्वयं लेता हूं,”
ग्रामीणों ने भी साफ कर दिया है कि अब वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। सभी मांगों पर ठोस, लिखित और समयबद्ध निर्णय होने तक उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो इसे राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

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Author: kakajee

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