रायगढ़। रायगढ़ जिले के थाना कोतरारोड़ क्षेत्र में वर्ष 2023 में घटित बहुचर्चित हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार ठाकुर के न्यायालय ने 27 फरवरी को मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को हत्या के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। इस संवेदनशील और गंभीर प्रकरण की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी कोतरारोड़ उपनिरीक्षक गिरधारी साव द्वारा अत्यंत पेशेवर दक्षता, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और ठोस अनुसंधान के आधार पर की गई, वहीं मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहन सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी करते हुए साक्ष्यों और गवाहों को मजबूती से प्रस्तुत किया जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय में अभियोजन पक्ष मजबूत स्थिति में रहा और आरोपियों को उनके जघन्य अपराध के अनुरूप कठोर सजा सुनिश्चित हो सकी।
उपनिरीक्षक गिरधारी साव की विवेचना की विशेषता यह रही कि उन्होंने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट को समयबद्ध तरीके से संकलित कर न्यायालय में प्रस्तुत किया। उनकी सटीक और निष्पक्ष विवेचना के परिणामस्वरूप गंभीर अपराधों में लगातार छठवीं बार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सफलता मिली है, जो उनके पेशेवर कौशल, अपराध अनुसंधान क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है।
वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह द्वारा जिले में विवेचना की गुणवत्ता सुधारने, साक्ष्य आधारित जांच सुनिश्चित करने और आरोपियों को उनके अपराध के अनुरूप कठोर दंड दिलाने के लिए लगातार प्रभावी मार्गदर्शन, निगरानी और रणनीतिक दिशा प्रदान की जा रही है, जिसका सकारात्मक परिणाम न्यायालयीन मामलों में लगातार मिल रही सजा के रूप में सामने आ रहा है।
अभियोजन के अनुसार, 24 जनवरी 2023 को सूचनाकर्ता मुन्ना कुमार ने थाना कोतरारोड़ में रिपोर्ट दर्ज कर बताया कि वह खैरपुर जमुनीपारा में अपने जीजा छोटनराम और बहन ललिता देवी के साथ रहता था और सेल्फ मिस्त्री का कार्य करता था। 26 जनवरी को नए मकान के गृह प्रवेश की तैयारी के दौरान 24 जनवरी को बिजली का कार्य चल रहा था, तभी मोहल्ले का रहने वाला देवव्रत मोटरसाइकिल से वहां आया, जिस पर गली के मरम्मत कार्य को लेकर विवाद हुआ और वह वहां से चला गया। कुछ समय बाद देवव्रत अपने साथी कार्तिक राम तुरी के साथ वापस आया और दोनों ने गाली-गलौच करते हुए विवाद शुरू कर दिया। विवाद के दौरान कार्तिक राम तुरी ने अपने पास छिपाकर रखी सब्जी काटने की लोहे की छुरी निकालकर ललिता देवी के पेट में जानलेवा वार कर दिया। बीच-बचाव करने आए छोटनराम पर भी उसी छुरी से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। दोनों घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज रायगढ़ ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान छोटनराम की मृत्यु हो गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना कोतरारोड़ में अपराध क्रमांक 42/2023 धारा 307, 302, 34 भादवि के तहत मामला पंजीबद्ध कर तत्कालीन थाना प्रभारी उपनिरीक्षक गिरधारी साव द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों कार्तिक राम तुरी और देवव्रत कुमार सिन्हा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। विवेचना के दौरान एकत्रित सशक्त साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और ₹1000 अर्थदंड तथा धारा 324 के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹1000 अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही न्यायालय ने पीड़ित परिवार को हुए मानसिक और शारीरिक आघात को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ क्षतिपूर्ति योजना 2011 के अंतर्गत पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का आदेश भी दिया है।
यह फैसला रायगढ़ पुलिस की सुदृढ़ विवेचना प्रणाली, उपनिरीक्षक गिरधारी साव की उत्कृष्ट जांच क्षमता और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के प्रभावी नेतृत्व का परिणाम है, जिसने यह सिद्ध किया है कि गंभीर अपराधों में सटीक अनुसंधान और मजबूत अभियोजन के माध्यम से अपराधियों को कठोर दंड दिलाना सुनिश्चित किया जा सकता है।
17
