घरघोड़ा में कानून को ठेंगा मंत्री की सख्ती कागजों पर धरातल पर रसूखदारों की गिद्ध दृष्टि और उड़ती राख

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​रायगढ़/घरघोड़ा। सरकारें विधानसभा के एसी कमरों में नियम बनाती हैं कसमें खाती हैं और दावों की झड़ी लगा देती हैं। लेकिन राजधानी से दूर जब धरातल की हकीकत देखी जाए तो नियम केवल फाइलों में दबे और रसूखदार उन पर नाचते नजर आते हैं।

घरघोड़ा ब्लॉक के नावपारा टेड़ा से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए खुलेआम फ्लाई ऐश का निपटान किया जा रहा है।​एक तरफ प्रदेश सरकार का संकल्प है कि भूमिहीन परिवारों को शासकीय भूमि आवंटित कर उन्हें खेती किसानी से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए। लेकिन विडंबना देखिए जिन गरीब कंधों को सरकार सहारा दे रही है उन्हीं की आवंटित कृषि भूमि पर अब उद्योगों के रसूखदारों और लिफ्टरों की गिद्ध जैसी नजर पड़ चुकी है। जिस जमीन पर धान की फसल लहलहानी चाहिए थी वहाँ अब जहरीली राख का ढेर लग रहा है।

​मंत्री का मॉडल एस ओ पी हुआ फेल:-
​अभी हाल ही के विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विपक्ष के तीखे सवालों का जवाब देते हुए सीना ठोककर कहा था किसरकार जल्द ही मॉडल एसओपी के तहत ही फ्लाई ऐश का निपटान करने जा रहा है किंतु यह केवल कानों को सुनने तक सीमित रही आँखों को देखने के लिए नही। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वन भूमि और कृषि भूमि पर राख डालना सख्त मना है। लेकिन घरघोड़ा की तस्वीरें मंत्री जी के दावों को मुँह चिढ़ा रही हैं। क्या प्रशासन मंत्री के निर्देशों को रद्दी का टुकड़ा समझता है।

​अजब तहसीलदार गजब पटवारी सिस्टम की शतरंज
​इस पूरे मामले में स्थानीय राजस्व अमले की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। नायब तहसीलदार का तर्क: घरघोड़ा नायब तहसीलदार का कहना है कि खसरा नंबर 311/4 पर पर्यावरण स्वीकृति के बाद काम हो रहा है। सवाल यह है कि क्या पर्यावरण विभाग ने कृषि भूमि को बंजर बनाने का लाइसेंस दे दिया है।
​पटवारी का बेचारा अंदाज पटवारी लोकेश पैकरा ने तो और भी कमाल की बात कही। उन्होंने माना कि भूमि पहले से कृषि भूमि है और आसपास खेती भी हो रही है लेकिन जांच प्रतिवेदन में ऐसा कोई कॉलम ही नहीं था जहाँ अगल-बगल की खेती का जिक्र किया जा सके।क्या अब नियमों का पालन सिर्फ कॉलम के भरोसे होगा अगर फॉर्म में कॉलम नहीं है तो क्या आँखों देखी हकीकत को दफन कर दिया जाएगा।

​जहरीली राख से किसका भला
​फ्लाई ऐश का यह अवैध निपटान न केवल मिट्टी की उर्वरता खत्म कर रहा है बल्कि आसपास रहने वाले ग्रामीणों के फेफड़ों में जहर घोल रहा है। रसूखदारों की साठगांठ और अधिकारियों की तकनीकी चुप्पी ने गरीब किसानों को हाशिए पर धकेल दिया है।​अब देखना यह होगा कि विधानसभा में बड़ी बड़ी बातें करने वाले जिम्मेदार इस फ्लाई ऐश कांड पर क्या एक्शन लेते हैं या फिर रसूखदारों का मैनेजमेंट इसी तरह नियमों का मखौल उड़ाता रहेगा।

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Author: kakajee

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