दहशत के साये में जोबी-खम्हार पालगड़ा घाटी: बेखौफ दौड़ रहे रेत तस्करों के ट्रैक्टर, बड़े हादसे का इंतजार!

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जोबी/खरसिया: जोबी से खम्हार पालगड़ा घाटी का सफर इन दिनों आम राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। ऊंचे पहाड़ और खतरनाक घुमावदार मोड़ों वाली इस सड़क पर रेत तस्करों के ट्रैक्टर काल बनकर दौड़ रहे हैं। रफ्तार इतनी तेज कि सामने से आने वाले दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों की रूह कांप जाती है। हैरानी की बात यह है कि शासन-प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध कारोबार और ओवरस्पीडिंग पर कोई लगाम नहीं है।
​खतरनाक मोड़ों पर ‘ओवरस्पीड’ का खेल
​पालगड़ा घाटी अपनी भौगोलिक बनावट के कारण बेहद संवेदनशील है। यहाँ कई जगहों पर सड़क काफी संकरी और अंधा मोड़ (Blind Turns) वाली है। नियमों को ताक पर रखकर रेत से लदे ट्रैक्टर इन मोड़ों पर भी अपनी गति कम नहीं करते। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रेत तस्कर पकड़े जाने के डर से या ज्यादा फेरे लगाने के चक्कर में ट्रैक्टरों को इतनी लापरवाही से चलाते हैं कि अन्य वाहनों को सड़क से नीचे उतरना पड़ता है।
​प्रशासन मौन, जनता में आक्रोश
​क्षेत्र में चर्चा है कि रेत तस्करों को न तो कानून का भय है और न ही किसी बड़ी दुर्घटना का। घाटी के ऊपर आए दिन होने वाली इस आवाजाही से सड़क भी जर्जर हो रही है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की सुस्ती के कारण इन तस्करों के हौसले बुलंद हैं। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या जानमाल की हानि के बाद ही जागेगा?
​मुख्य बिंदु:
​अंधाधुंध रफ्तार: घाटी के घुमावदार रास्तों पर तेज रफ्तार ट्रैक्टरों का कब्जा।
​हादसे का डर: राहगीरों और ग्रामीणों में हर वक्त अनहोनी की आशंका।
​बगैर लगाम अवैध परिवहन: बेखौफ रेत तस्करी से शासन को राजस्व की हानि और जनता को खतरा।
​ग्रामीणों की मांग:
क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग की है कि पालगड़ा घाटी मार्ग पर तत्काल पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और ओवरस्पीड व अवैध रेत परिवहन करने वाले ट्रैक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी मासूम की जान न जाए।

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Author: kakajee

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