वेदांता पावर प्लांट मामला: हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप, चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत चार पक्षों के खिलाफ अवमानना याचिका

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के 400 से अधिक भू-विस्थापित परिवारों का दावा—13 वर्षों से नहीं मिला पुनर्वास का लाभ; हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी भत्ता और रोजगार नहीं मिलने का आरोप

by Kakajee News

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाले लाभों से वर्षों से वंचित होने का आरोप लगाते हुए प्रभावित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पात्र भू-विस्थापित परिवारों को न तो नियमानुसार भत्ता दिया गया और न ही पुनर्वास नीति के तहत अन्य लाभ उपलब्ध कराए गए। इस मामले में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है।
यह विवाद सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित उस पावर प्लांट से जुड़ा है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था और बाद में वर्ष 2022 में वेदांता समूह ने इसका अधिग्रहण किया। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिसमें 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे।
भू-विस्थापितों का कहना है कि छत्तीसगढ़ पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत उन्हें रोजगार या निर्धारित भत्ता मिलना चाहिए था, लेकिन पिछले 13 वर्षों से उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। उनका आरोप है कि प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ, 2016 में बंद हो गया और वर्ष 2025 में दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक प्रभावित परिवारों को न तो रोजगार मिला और न ही भत्ते का भुगतान किया गया।
प्रभावित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों ने इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई कर पात्र परिवारों को राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति ने भी प्लांट प्रबंधन को पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश जारी किए थे।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन निर्देशों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि करीब दो माह पहले सक्ती कलेक्टर ने भी हाईकोर्ट के आदेश के पालन के लिए प्लांट प्रबंधन को निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक प्रभावित परिवारों को कोई राहत नहीं मिली। इसी आधार पर अब हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है।
यह मामला केवल एक औद्योगिक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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