ढाबा और गैरेज से चोरी करने वाला शातिर चोर गिरफ्तार, चोरी का पूरा माल और बाइक बरामद, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर सूचना बनी सफलता की कुंजी

by Kakajee News

रायगढ़. एसएसपी शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन पर रायगढ़ पुलिस की अपराधों पर त्वरित कार्रवाई की नीति के तहत छाल पुलिस ने ग्राम हाटी स्थित मितान ढाबा और समीप के गैरेज में हुई चोरी की वारदात का महज 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी गया मोबाइल, दो प्रेसर जैक और वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद कर ली है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।
जानकारी के मुताबिक 26 जुलाई को मितान ढाबा संचालक भागीरथी साहू (42 वर्ष) ने थाना छाल में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 25 जुलाई की रात करीब 11 बजे ढाबा बंद कर सभी कर्मचारी सो गए थे। अगले दिन सुबह उठने पर बिल काउंटर पर रखा उनका वीवो वाय-12 मोबाइल गायब मिला और काउंटर का सामान बिखरा हुआ था। इसी दौरान ढाबे के समीप स्थित गैरेज संचालक अशरफ अली ने भी अपने गैरेज से दो प्रेसर जैक चोरी होने की जानकारी दी। शिकायत पर थाना छाल में धारा 301(4) एवं 305(ए) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
माल मुल्जिम पतासाजी के दौरान पुलिस टीम ने ढाबे में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, जिसमें रात करीब 2ः15 बजे एक युवक बिल काउंटर से मोबाइल चोरी करते तथा बाद में गैरेज से दो प्रेसर जैक मोटरसाइकिल में ले जाते हुए दिखाई दिया। चोरी गए सामान की कुल कीमत लगभग 17 हजार आंकी गई। फुटेज के आधार पर पुलिस ने मुखबिर तंत्र सक्रिय किया, जिससे ग्राम कुडेकेला निवासी महेश दास महंत पर संदेह हुआ। पूछताछ में आरोपी पहले पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ किए जाने पर उसने अपराध स्वीकार कर लिया।
आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर पुलिस ने बोकरामुड़ा और रिलो के बीच जंगल में छिपाकर रखे दो प्रेसर जैक और एक एंड्रॉयड मोबाइल बरामद किए। साथ ही घटना में प्रयुक्त पल्सर मोटरसाइकिल भी जब्त की गई। आरोपी महेश दास महंत (32 वर्ष), पिता बिरजू उर्फ तेजू दास महंत, निवासी ग्राम कुडेकेला, थाना छाल, जिला रायगढ़ को 27 जुलाई को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
चोरी की इस वारदात का 24 घंटे के भीतर सफल खुलासा करने में थाना प्रभारी छाल निरीक्षक नासिर खान, प्रधान आरक्षक शंभू पाण्डेय, प्रधान आरक्षक शंकर सिंह क्षत्रिय एवं आरक्षक भगवती लक्ष्मे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रायगढ़ पुलिस ने एक बार फिर साबित किया कि तकनीकी साक्ष्य, प्रभावी मुखबिर तंत्र और सतर्क पुलिसिंग के समन्वय से अपराधियों तक तेजी से पहुंचना संभव है।

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