रायपुर। रायपुर रेलवे स्टेशन पर संयुक्त कार्रवाई में अमरकंटक एक्सप्रेस से भोपाल से लाई गई करीब 500 किलो प्रतिबंधित एनालाग पनीर की खेप जब्त की गई। पनीर 10 बड़े डिब्बों में भरकर लाया गया था। अधिकारियों ने नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। यह पनीर केंद्रीय कृषि मंत्री व मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिक की कंपनी सुधामृत का बताया जा रहा है। हालांकि अभी पुष्टि होना बाकी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह खेप शहर के होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सप्लाई की जानी थी। विभाग अब यह पता लगा रहा है कि माल किस व्यापारी ने मंगाया था और इसकी आपूर्ति किन स्थानों पर होनी थी। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले भी रायपुर स्टेशन पर इसी तरह की बड़ी कार्रवाई हुई थी। प्रदेश में इसी माह की शुरुआत में एक वर्ष के लिए एनालाग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
बिना बुकिंग के पनीर पार्सल की जांच करते सुरक्षा बल के जवान। नईदुनिया
रायपुर स्टेशन से लगातार तस्करी
रेलवे स्टेशन न सिर्फ सुरक्षा की खामियों से जूझ रहा है, बल्कि अवैध गतिविधियों और तस्करी का भी सेफ जोन बनता जा रहा है। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा प्रदेश में एनालाग (नकली) पनीर की बिक्री व निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद रायपुर स्टेशन से ट्रेनों के जरिये रोजाना सैकड़ों किलो नकली पनीर अन्य शहरों में जा रहा है। दो दिनों के भीतर रायपुर स्टेशन से कुल छह सौ किलो पनीर जब्त किया गया है। इसमें सौ किलो की खेप अंबिकापुर बिना बुकिंग के भेजे जाने की तैयारी थी। वहीं बुधवार की सुबह भोपाल से रायपुर आई 500 किलो पनीर की खेप भी जब्त की गई है।
न बारकोड, न लेबल
अंबिकापुर भेजी जा रही खेप में ऐसे पार्सल थे जिन पर न तो कोई बारकोड था और न ही रेलवे का कोई अधिकृत लेबल। सवाल उठ रहा है कि बिना बुकिंग के 100 किलो की पेटियां प्लेटफार्म नंबर पांच तक कैसे पहुंच गईं? इस संबंध में पक्ष लेने के लिए सीनियर डीएससी रमण किरण से संपर्क करने का प्रयास किया गया, पर संपर्क नहीं हो सका।
मास्टरमाइंड की चैट से खुला तस्करी का पुराना नेटवर्क
मामले की तह तक जाने के लिए जब नईदुनिया टीम पार्सल आफिस पहुंची तो वहां टीम की गतिविधियों पर नजर रख रहा एक संदिग्ध युवक पकड़ा गया। आरपीएफ अधिकारियों की मौजूदगी में पूछताछ करने पर उसने अपना नाम प्रांशु राय, निवासी कटनी बताया। प्रांशु ने कबूल किया कि आशीष जायसवाल नामक व्यक्ति के कहने पर वह बिना बुकिंग के दो पेटियां (100 किलो) नकली पनीर ट्रेन में चढ़ाने आया था। वह सौरभ शर्मा और आशीष जायसवाल के लिए पनीर सप्लाई का काम करता है।
रोजाना बड़े पैमाने पर नकली पनीर की तस्करी
प्रांशु के मोबाइल की जांच करने पर आशीष जायसवाल का नंबर और सौरभ शर्मा नाम के व्यक्ति के साथ वर्ष 2024 से लगातार हो रही चैट मिली। इस चैट से स्पष्ट हुआ कि रायपुर स्टेशन के जरिये लंबे समय से रोजाना बड़े पैमाने पर नकली पनीर की तस्करी की जा रही है।
एक वर्ष पहले खाद्य विभाग के दफ्तर से गायब हुआ था 2400 किलो पनीर
इस पूरे फर्जीवाड़े के तार एक वर्ष पुराने चर्चित मामले से जुड़े हैं। तब खाद्य सुरक्षा विभाग के दफ्तर से ही 2,400 किलो जब्त पनीर चोरी हो गया था। सूत्रों के अनुसार इस कांड में भी सौरभ शर्मा नाम के पनीर दलाल की भूमिका सामने आई थी। अब प्रांशु के मोबाइल से मिली सौरभ की चैट से पनीर तस्करी के इस सिंडिकेट के सक्रिय होने की बात सामने आ रही है।
खाद्य विभाग की टीम ने सैंपल लेकर जब्त की खेप
नईदुनिया की सूचना पर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी विनोद गुप्ता और संतोष ध्रुव पहुंचे। अधिकारियों ने प्रांशु राय की मौजूदगी में पनीर के सैंपल दर्ज किए और पूरी खेप को जब्त कर लैबोरेट्री जांच के लिए भेज दिया है।
रायपुर स्टेशन से जब्त 500 किलो पनीर से भरी बोरियां।
भोपाल से अमरकंटक एक्सप्रेस में पहुंची 500 किलो की खेप
बुधवार को रायपुर रेलवे स्टेशन पर एक बार फिर करीब 500 किलो नकली एनालॉग पनीर की बड़ी खेप पकड़ी गई। यह खेप भोपाल से अमरकंटक एक्सप्रेस के जरिए रायपुर लाई गई थी। सूचना मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग और रेलवे के अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए माल को जब्त कर लिया। पनीर के नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं।
राज्य सरकार ने लगाया है प्रतिबंध
राज्य के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ की पूरी सीमा में ऐसे “डेयरी एनालॉग” या गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है, जो असली दूध उत्पाद होने का भ्रम पैदा करते हैं। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30 एवं 18 के तहत यह कार्रवाई की गई है। आदेश में विशेष रूप से पनीर, क्रीम, मक्खन जैसे अमानकीकृत उत्पादों पर रोक लगायी गई है, जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा या वनस्पति तेल का उपयोग किया जाता है।
किन उत्पादों पर लागू होगा प्रतिबंध
- जो उत्पाद वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं।
- जिनमें दूध की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का उपयोग हो।
- जिनकी लेबलिंग, पैकेजिंग या प्रदर्शन उपभोक्ताओं को गुमराह करता हो।
- फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज़ और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पादों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
