पिछले साल के शुरू में आम लोगों को गाइडलाइन रेट से कुछ ज्यादा पर सरकारी खाली जमीन बेचने की योजना शुरू हुई और दो-तीन माह में 500 से ज्यादा आवेदन भी आ गए, लेकिन अब हालात ये हैं कि इनमें 430 से ज्यादा निरस्त कर दिए गए। वजह ये बताई गई कि लोगों ने जो सरकारी जमीन खरीदने की अर्जी दी थी, वहां निगम, पीडब्ल्यूडी या दूसरे विभाग की कोई न कोई योजना अा रही थी। इसके बाद नियमों को आसान कर इसी जनवरी में फिर से आवेदन मंगवाए गए।
पहला अनुभव इतना खराब था कि तीन माह बीत गए, लोगों ने एक भी आवेदन नहीं लगाया। पड़ताल में यह बात सामने आई कि ज्यादातर सरकारी प्लाट बड़े हैं और गाइडलाइन रेट के साथ और रकम जुड़ने से ये आम लोगों की पहुंच से ही दूर चले गए हैं।
कोरोना की वजह से रियल एस्टेट में भी नए प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो रहे हैं, इसलिए बिल्डरों ने भी हाथ खींच लिए हैं। राजधानी-आउटर में सरकारी जमीन खरीदने के लिए फॉर्म प्रशासन की वेबसाइट www.raipur.gov.in पर अपलोड किया गया है।
इस आवेदन के साथ सभी दस्तावेजों को कलेक्टोरेट के कमरा नंबर 28 में जमा करना होगा। लोगों का कहना है कि आवेदन के साथ जमीन के कई दस्तावेज भी मांगे जा रहे हैं। हालांकि अफसरों का कहना है कि एक बार आवेदन जमा होने के बाद किसी दस्तावेज की कमी होगी तो लोगों को उसकी जानकारी दी जाएगी। उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा। किसी का भी आवेदन तत्काल निरस्त नहीं किया जाएगा।
इसलिए हुई योजना फेल
सरकारी जमीन खरीदने हो तो इतने दस्तावेज चाहिए कि लोग जुटा नहीं सकते
आवेदन करने के बाद इतने चक्कर कि यही देखकर लोगों ने नहीं दिखाई रुचि
जिस सरकारी जमीन के लिए आवेदन, उसमें दूसरे विभागों का बड़ा अड़ंगा
आउटर में ज्यादातर बड़े प्लॉट, गाइडलाइन रेट के कारण मूल्य आसमान पर
दूसरे विभागों का भी रोड़ा
रायपुर एसडीएम दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार पिछली बार ज्यादातर लोगों ने नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे की जमीन मांग ली थी। इसके अलावा अधिकतर लोग ऐसे भी थे जो निगम की जमीन खरीदना चाहते थे। इस वजह से 80 फीसदी आवेदन निरस्त कर दिए गए। लोक निर्माण विभाग की ओर से बनने वाली सड़क, निगम की स्मार्ट योजनाएं और सड़क, तालाबों और पानी वाली जमीन खरीदने के लिए भी लोगों ने आवेदन कर दिया था।
तहसील में आवेदन मिलने के बाद अफसरों ने विभागों से एनओसी लेने के लिए आवेदनों को उनके पास भेजा तो आधा दर्जन से ज्यादा विभागों ने शासकीय जमीन की बिक्री पर आपत्ति लगा दी। नगर निगम, खनिज और पीडब्ल्यूडी ने सबसे ज्यादा विरोध किया। इसीलिए सरकारी जमीन खरीदी के ऐसे तमाम आवेदन निरस्त कर दिए गए। अफसरों ने साफ कर दिया है कि केवल उन्हीं सरकारी जमीन की बिक्री की जाएगी जो किसी विभाग के अधीन न हो और न ही किसी योजना के लिए आरक्षित हो।
