आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में सफलता से जुड़ी कई नीतियों का वर्णन किया है। चाणक्य की इन नीतियों को अपनाकर लोग आज भी सफल होते हैं। आचार्य चाणक्य का मानना है कि जो व्यक्ति 6 प्रकार के विकारों पर सफलता हासिल कर लेता है, वही जीवन में मान-सम्मान व सफलता हासिल करता है। शास्त्रों में इन विकारों को षडरिपु के नाम से जाना जाता है।
जानिए षडरिपु क्या हैं?
- काम
- क्रोध
3.मद - लोभ
- मत्सर
- मोह
काम वासना से बनाएं दूरी- विद्वानों का कहना है कि व्यक्ति को काम वासना से दूर रहना चाहिए। काम वासना व्यक्ति की प्रतिभा को नष्ट कर देती है और उसे उसके लक्ष्य से भटकाती है।
क्रोध है सबसे बड़ा दुश्मन- गीता में उपदेश देते हुए भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि व्यक्ति को सबसे बड़ा दुश्मन क्रोध है। क्रोध में व्यक्ति अच्छे और बुरे में अंतर नहीं कर पाता है। ऐसे में वह ऐसी गलतियां कर बैठता है, जिससे उसे स्वयं नुकसान होता है। क्रोधी व्यक्ति दूसरों का जीवन भी संकट में फंसा सकता है।
अंहकार (मद) से रहें दूर- चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति अंहकार से हमेशा दूर रहना चाहिए। घमंड में डूबा व्यक्ति सच्चाई से दूर रहता है। विपरीत परिस्थितियों में ऐसे व्यक्ति को दुख और कष्ट उठाने पड़ते हैं।
लोभ से दूरी- चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को लोभ यानी लालच से हमेशा दूर रहना चाहिए। लोभी व्यक्ति कई बार स्वार्थी बन जाता है। जिसके कारण उसके जीवन की शांति भंग हो जाती है।
मत्सर (ईर्ष्या का त्याग)- विद्वानों के अनुसार, ईर्ष्या दुखों में वृद्धि करती है। ईर्ष्या से भरा व्यक्ति नेगेटिविटी से घिर जाता है। ऐसे व्यक्ति को सफलता हासिल नहीं होता है।
मोह से दूरी- विद्वानों का कहना है कि व्यक्ति को मोह से दूर रहना चाहिए। मोह के कार ऐसे लोगों को कभी-कभी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
