लॉकडाउन का भय…हर किसी की इच्छा- जल्द से जल्द पहुंच जाएं अपने घर

by Kakajee News

इंदौर । महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी के बीच वहां से लोगों के पलायन में भी तेजी आ रही है। लोग लगातार बायपास से होते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार जा रहे हैं। रविवार को भी ऐसे वाहन बड़ी संख्या में बायपास से गुजरे। मुंबई में कोरोना के मामलों में इजाफा होने और वहां काम बंद होने से उत्तर भारत से आए लोग लगातार वापस लौट रहे हैं। दोनों राज्यों के बीच बसें बंद होने से लोग निजी वाहनों से जा रहे हैं। महाराष्ट्र में पंजीकृत वाहन बायपास से लगातार गुजर रहे हैं। इनमें लोग अपने घरों की तरफ जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बीते साल अचानक लाकडाउन की घोषणा होने और ट्रेनों के बंद होने से ऐसे परिवारों को काफी परेशानी हुई थी। इसके अलावा बसें पूरी तरह से बंद हो गई थीं। इससे बड़ी संख्या में लोग पैदल ही अपने घरों की तरफ बढ़ चले थे।
ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस बार ट्रेन चल रही है। इसके अलावा लोग खुद के वाहनों और ट्रेन से रवाना हो रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मुंबई में आटो चलाने वाले इससे ही उत्तरप्रदेश लौट रहे हैं। हालांकि लोगों को पानी-भोजन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इंदौर बायपास के सभी ढाबे लाकडाउन के कारण बंद हैं। इससे लोगों को खाना नहीं मिल पा रहा है।

इधर नहीं मिल रहे यात्री, खाली चल रही बसें
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच फिर से लगाए गए लाकडाउन में इस बार बसों को अनुमति दी गई है, लेकिन कोरोना के कारण यात्री सफर ही नहीं कर रहे हैं। भोपाल जाने वाली बसें खाली चल रही हैं। प्राइम रूट बस आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने बताया कि यात्रियों की कमी के कारण बसों की संख्या कम हो गई है। संभाग के रूटों पर इक्का-दुक्का बसें चल रही हैं। उनमें भी यात्री नहीं मिल रहे हैं, जिससे बसों का टोल का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। देवास जाने वाली बसों में भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। बस संचालकों ने बसों का संचालन ही बंद कर दिया है। इधर अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड द्वारा संचालित की जाने वाले इंदौर-भोपाल चार्टर्ड बसों की हालात भी खराब है। इन बसों में नाममात्र के यात्री सफर कर रहे हैं।
शनिवार को गई एक बस में केवल 6 यात्री सवार थे, लेकिन पहले से बुकिंग होने से बसों को निरस्त नहीं किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार अब बसों के फेरे कम कर दिए गए हैं। इधर, आटो रिक्शा महासंघ के राजेश बिड़कर ने बताया इस बार आटो को अनुमति दी गई है। केवल मरीजों और यात्रियों को स्टेशन या बस स्टैंड छोड़ने के लिए आटो चल रहे हैं। इसमें भी आटो स्टैंड पर खड़े होने की अनुमति नहीं है। यात्रियों की संख्या काफी कम हो गई है।

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