शशि कोन्हेर द्वारा

बिलासपुर। कहां जाता है कि इंसान पर मुसीबत अकेले नहीं आती। अपने साथ कई और समस्याएं भी लेकर आती है। कुछ ऐसा ही हाल कोविड-19 के संक्रमण की वजह से फैली महामारी में हो रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाना तथा बार बार साबुन से हाथ धोना.. यहां तक तो ठीक है। लेकिन इन सबके बावजूद कोई गारंटी नहीं है कि ऐसा करने वाला शख्स संक्रमण से बच सकता है। देश और शहर मे अभी तक न जाने, कितने ऐसे लोग भी करोना की चपेट में आकर कालकवलित हो चुके हैं, जो दिन भर मास्क लाते रहे और बार-बार साबुन से हाथ भी धोते रहे । लेकिन यह मास्क लगाने वाले और बार-बार आजाद होने वाले महानुभाव भी संक्रमण की चपेट में आकर अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे। इस बार का लॉकडाउन, घर परिवार के बड़े बुजुर्गों और विवाह योग्य वर-वधुओं के लिए भी एक बड़ी समस्या खड़ा कर रहा है। शासन ने इस दौरान शादी समारोह का आयोजन पूर्व अनुमति के साथ देने की बात कही है। लेकिन शर्त यह है कि सिर्फ शादी होगी “समारोह” नहीं होगा। और उसमें भी अधिकतम 20 लोग ही शरीक हो सकते हैं। और यह भी गाइड लाइन में दिया गया है कि विवाह के लिए पूर्व में दी गई सभी अनुमति निरस्त मानी जाएगी। और सभी को नए सिरे से अनुमति लेनी होगी। ऐसे में जिनके घरों में पुत्री या पुत्र की शादी होनी है। उनके लिए यह कितनी बड़ी मुसीबत है इसका अनुमान वही लगा सकता है जिस परिवार पर लॉकडाउन यह कहर बरपा रहा है। लेकिन नियम तो नियम है। और सख्त लॉक डाउन के कारण सभी को इनका पालन करना ही पड़ेगा। लिहाजा, आज सप्ताह के पहले दिन तहसील कार्यालय खुलते ही शादी विवाह के लिए एसडीएम के पास विवाह के लिए नए सिरे से अनुमति और पंजीयन तहसील ऑफिस में लंबी कतार मे लोग खड़े रहे। शादी के परमिशन के लिए लोग शादी के कार्ड, आवेदन और मूड ऑफ के मूड में तहसील ऑफिस में डटे रहे कि, किसी तरह उन्हें अनुमति मिल जाए। और उनकी बिटिया या बेटे की शादी 20 लोगों की मौजूदगी में ही बिना किसी बाधा के संपन्न हो जाए।
(सभी तस्वीरें- वरिष्ठ पत्रकार अशरफ मेंमन द्वारा)
