रायगढ़. बीमारी बड़ी हो और गरीबी का साया सिर पर मंडराने लगे तो ऐसे में बडी बीमारी का इलाज कैसे होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। रायगढ़ के संजय मैदान के पास रहने वाले करमन दास महंत का 17 साल का बेटा दो साल से किडनी की बीमारी से जूझ रहा है और उसकी दोनों किडनिया फैल हो चुकी है। रायगढ़ के मेट्रो हास्पीटल में सप्ताह में दो दिन डायलेसिस होनें के बाद वह वापस घर आने को मजबूर हो जाता है चूंकि आगे इलाज के लिए उसके पास पैसे नही है। मात्र 17 का भीष्मदेव महंत 10वीं की परीक्षा 2013 में देने के बाद आगे की पढ़ाई करने की लालसा भी रखता है लेकिन इस बड़ी बीमारी के चलते वह घर में रहने को मजबूर है। अपने मां-बाप का लाडला बेटा भीष्म देव दोनों किडनी खराब होनें से कमजोर भी हो रहा है कारण है उसका महंगा इलाज। भीष्मदेव की बीमारी का पता लगने के बाद सहयोग टीम की अध्यक्ष मंजु अग्रवाल व उनकी सहयोगी वीरांगना दुबे करमन दास महंत के घर पहुंचते हैं और उसके बेटे से मिलकर आगे का इलाज अच्छे से हो सके उसके लिए जिले के समाज सेवियों के साथ-साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाएंगे और जरूरत पड़ी तो प्रधानमंत्री से भीष्मदेव की दोनों किड़नियों का सफल इलाज हो उसके लिए भी प्रयास करेंगे।
संजय मैदान के पास छोटी सी किराना दुकान चलाने वाले करमन दास महंत बीपीएल परिवार से आते हैं और गरीबी रेखा कार्ड के चलते उन्हें समय पर अनाज व अन्य सुविधाएं मिल जाती है। पर अचानक 2019 में जांच के दौरान उनके छोटे बेटे भीष्म देव की दोनों किडनियां खराब होनें की जानकारी मिलने के बाद बुढ़े पिता की आंखे नम हो जाती है और वह इस बात को लेकर चिंता में है इतना महंगा इलाज वह कैसे करा पाएगा। करमन दास के साथ उनकी पत्नी अपने बेटे को एक-एक किडनी देने को तैयार है और आगे की जांच के लिए कोई अगर सहयोग करता है तो अहमादाबाद जाकर आगे की कार्रवाई करने को भी तैयार हैं। बुढे़ माता पिता रोते हुए बताते हैं कि उनका बड़ा लड़का ऋषिकेस 32 साल का है उसकी भी मानसिक हालत ठीक नही है और घर में छोटा बेटा भीष्म देव किडनी खराब होनें से जीवन और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।
सहयोग टीम की अध्यक्ष मंजु अग्रवाल ने इस परिवार से मिलने के बाद बताया कि भीष्मदेव का इलाज अच्छे से हो सके इसके लिए वह रेडक्रास के संचालक मुकेश शर्मा से चर्चा करके सरकारी सहायता के लिए भी प्रयास कर रही है। मंजु अग्रवाल ने बताया कि किडनी बदलवाने के लिए इसके माता-पिता तैयार है और वे अपनी एक-एक किडनी बच्चे की जान बचाने के लिए दोनों को तैयार हैं। अहमादाबाद या किसी बडे संस्थान में जाकर पूरी रिपोर्ट तैयार कराने के लिए भी कम से कम 30 से 40 हजार रूपए पहले खर्च होंगे और इलाज के लिए भी 15 से 20 लाख रूपए खर्च होनें का अनुमान है, वह बताती है कि गरीबी रेखा के लिए जीवन यापन करने वाले करमन दास ने अपने स्तर पर बच्चे का इलाज एक साल से करवाना जारी रखा है लेकिन अब धीरे-धीरे परिवार की स्थिति बहुत खराब होते जा रही है और इसके लिए सामाजिक संस्थाए और कोई बड़ा एनजीओ भीष्मदेव की बीमारी का इलाज कराने के लिए सामने आए उसकी वे अपील करती हैं। वर्तमान में मेट्रो हास्पीटल में भीष्मदेव आयुष्मान कार्ड के जरिए सप्ताह में दो दिन डायलेसिस कराता है और इसी डायलेसिस के बदलौत जिंदा है। समय रहते भीष्म देव की जान बचाने के लिए उसका किडनी ट्रांसप्लांट कराना आवश्यक है और इसके लिए सहयोग समिति सहित अन्य सहयोगी संस्थाएं आगे आकर मदद करने की शुरूआत करें।
पीड़ित करमन दास महंत ने जिले की जनता से अपील की है कि उसके 17 साल के बेटे की दोनो किडनियांें में से एक बदलवाने के लिए सहायता करें ताकि मासुम की जान बच सके। वह कहता है कि उसके पास सरकार का केवल गरीबी रेखा के नीच जीवन यापन करन वाला राशन कार्ड है और छोटे से दुकान चलाकर परिवार चला रहा है ऐसे में वह जनता से सहयोग के अपील के बिना इलाज कराने में असमर्थ है।
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