रायगढ़। क्षेत्र के कुख्यात सट्टा खाई वालों में इन दिनों अचानक हड़कंप मच गया है। वे इस बात से खासे परेशान हैं कि अचानक पुलिस को क्या हो गया है और वह उनके पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ी है। ये सट्टा खाईवाल और ऐसे अन्य यहां दशकों से अवैध सट्टे के धंधे से खुद को और कई कानून के रखवालों को लाल और मालामाल कर चुके हैं। इसलिए इन पर कभी तगड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती लेकिन, वर्तमान में पुलिस अधीक्षक कुछ दूजे किस्म के हैं। इनके निर्देश के बाद सट्टा खाईवालों की शामत आ गई है। सट्टा खाईवालों को पकड़ने में बहाने बनाती नजर आती पुलिस को अब सट्टा खाईवालों के न केवल ठिकाने पता चल रहे हैं बल्कि, उन्हें अब दबोचा भी जा रहा है। पुलिस के घर देर है पर अंधेर नहीं की तर्ज पर अब जिले के अधिकांश घोषित बड़े सट्टा खाईवाल जो अब तक मैनेजमेंट पर भरोसा रखते हुए किसी से खौफ नहीं खाते थे वह भी अब उठाए जा रहे हैं।
गुरूवार को खरसिया पुलिस ने साइबर सेल के साथ जॉइंट ऑपरेशन चलाते हुए खरसिया के सबसे बड़े खाईवाल विक्की अग्रवाल समेत एक दर्जन से अधिक खाईवालों के खिलाफ धर पकड़ की कार्रवाई को अंजाम दिया है। खरसिया के यह वही सट्टा खाईवाल हैं जो कभी खरसिया गेस्ट हाउस में महिला वर्दीधारी अधिकारी की सेवा के लिए परेड करते हुए देखे जाते थे।
पुलिस सूत्रों पर गौर करें तो दबोचे गए खाईवालों के कब्जे से लाखों की सट्टा-पट्टी के साथ बड़े पैमाने पर कैश भी बरामद किए गए हैं।
एक दशक से विक्की का एकछत्र राज
खरसिया क्षेत्र में विक्की अग्रवाल का नाम मटका बाजार की दुनिया में शायद ही किसी परिचय का मोहताज हो। बताया जाता है कि रायगढ़ से सक्ती,चाम्पा तक विक्की की सल्तनत कायम है। कल्याण, बॉम्बे, राजधानी से लेकर क्रिकेट सट्टा का इसे बेताज बादशाह माना जाता है। ऐसी बात नहीं कि विक्की के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई न की हो, लेकिन राजनीतिक वरदहस्त प्राप्त होने के कारण गाहे बगाहे की कार्रवाई के बाद विक्की ने हमेशा बड़े रूप में न सिर्फ अपना नेटवर्क फैलाया, बल्कि पुलिस के लिए चुनौती भी बना रहा है।
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