रायगढ़. समाज में जहां विकलांग को दया की दृष्टि से देखा जाता है और हर संभव उसकी मदद को हाथ आगे बढ़ाते हैं। वहीं एक गरीब परिवार का सदस्य दुर्घटना में अपना पैर गंवा लेने के बाद न्याय की आस लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। परंतु उसकी समस्या सुनने वाला कोई भी नही। यह कोई पहला मामला नही जब जिले के किसी थाना में पीड़ित की गुहार को अनसुनी न किया गया हो। इस तरह के कई और मामले जिले के अलग-अलग थानों में पहुंचते तो जरूर है परंतु वहां भी सुनवाई न होनें से उनका मनोबल टूट जाता है। इस स्थिति में पीड़ित के पास कोई और रास्ता नही बचता और वे पुलिस कप्तान के दरबार न्याय की आस लिए पहुंचते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को ऐसे मामलों को संज्ञान में लेकर तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है। ताकि लोगों को पुलिस के कार्रवाई पर भरोसा बना रहे। साथ ही समाज में पुलिस की धूमिल होती छवि को बचाया जा सके।
झारखण्ड जिले के खरमधी के रहने वाले राकेश कुमार ने अपने शिकायत पत्र में कहा है कि वह 14 चक्का क्र. सीजी 15 डीके 3249 का खलासी है। वाहन मालिक मिथिलेश कुमार ओझा निवासी सनकुरवा थाना गढवा के द्वारा अपना वाहन अजय पाल गढ़वा जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम मकरी थाना जिला भवनाथपुर निवासी को दिया है। उक्त वाहन में 29 मार्च को विशाखापट्नम से कोयला लेकर रायगढ़ आने के दौरान बरमकेला के पास वाहन चालक अजय पाल के द्वारा तेज एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने से वाहन पलटा दिया गया। दुर्घटना में वाहन के खलासी राकेश कुमार के बांय पैर में गंभीर चोट आने की वजह से उसे वाहन चालक के द्वारा अपेक्स हास्पीटल में भर्ती करा दिया गया। परंतु महंगे उपचार हेतु वाहन के खलासी के पास पर्याप्त पैसे नही होनंे की वजह से वह रांची जाकर वहां के अस्पताल में भर्ती हो गया। जहां उपचार के दौरान पैर में इंनफेक्शन होनंे की वजह से उसका पैर काटना पड़ गया। पैर कट जाने की स्थिति में राकेश कुमार अपंग हो चुका है, और न्याय की गुहार के लिए परिजन दर-दर की ठोंकरे खा रहे हैं।

गत 02 अपै्रल को राकेश कुमार के मामा सुरेन्द्र पाल ने बरमकेला थाना में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे इस दौरान थाने में मंुशी बैठे थे जिन्हें लिखित शिकायत दी गई। इस दौरान मुंशी का कहना था कि थाना प्रभारी अभी पेट्रोलिंग में है उनके कहने पर भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बावजूद पीड़ित के परिजनों चार घंटे तक बरमकेला थाना में बैठे रहे परंतु थाना प्रभारी थाना पहुंचे ही नही। इसके बाद थक हारकर हताश होकर पीड़ित के परिजन वापस घर लौट गए। पीड़ित के परिजन आज पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने की अपील की गई है ताकि वह न्यायालय में वाद दायर कर क्षतिपूर्ति राशि की मांग कर सके। देखना यह है कि इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब क्या कदम उठाते हैं।
शिकायतों का निराकरण करना पुलिस का फर्ज, लापरवाह थानेदारों पर भी होती है कार्रवाई- अभिषेक वर्मा

इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा का कहना है कि ज्यादातर शिकायतें सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय करने के लिए लोग पहुंच जाते हैं और उनको लगता है कि यहां आवेदन देने के बाद तत्काल कार्रवाई होगी जबकि यहां से भी आवेदन देने के बाद संबंधित थाने को ही उसका आवेदन भेजा जाता है। उन्होंने कहा है कि अगर किसी थाने में पीड़ित की शिकायत नही ली जाती तो उस पर भी संबंधित थानेदार पर कार्रवाई की जाती है। जनता न्याय की आस लेकर यहां तक आती है तो उन्हें निराश नही किया जाता। पीडित राकेश कुमार के मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आज ही वो कार्यालय आए थे उनके आवेदन पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
