माओवादियों के निशाने पर सुरक्षाबल, टारगेट पर हैं छोटी-छोटी टुकड़ियां, बचाव के लिए गाइडलाइंस जारी

by Kakajee News

झारखंड में माओवाद प्रभाव वाले इलाकों में सुरक्षाबलों पर खतरा बढ़ा है। हाल के दिनों में आईईडी, डायरेक्शनल बम समेत नई तकनीकों के इस्तेमाल ने माओवादियों को मजबूत किया है। सीधे मुकाबले के बजाय माओवादी आईईडी के जरिए पुलिस को ज्यादा परेशान कर रहे हैं।

माओवादियों ने अपने प्रभाव वाले इलाकों की घेराबंदी इस तरह की है कि उस इलाके में पुलिस पैदल, पगडंडियों के सहारे भी पहुंचे तो उसे टारगेट किया जा सके। बीते आठ माह में ही चाईबासा में तकरीबन दो दर्जन बार पुलिस बलों को निशाना बनाया गया। मार्च महीने में लांजी में जगुआर के तीन कर्मी शहीद भी हुए, लेकिन पुलिस ने अधिकांश बार माओवादियों के द्वारा किए जाने वाले हमले की साजिश को विफल किया।

जमशेदपुर एसएसपी बाल-बाल बचे
सात अगस्त को जमशेदपुर एसएसपी तमिलवानन माओवादी हमले की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। माओवादियों के खिलाफ बोड़ाम इलाके में एसएसपी समेत अन्य पुलिसकर्मियों के द्वारा अभियान चलाया जा रहा था। अभियान के दौरान पुलिस ने दलमा पहाड़ के इलाके से 14 लैंडमाइंस बम बरामद किए।

9 अगस्त को भी चाईबासा जिले के टोकलो में सुरबुरा नया मार्केट के पास प़ुलिस बलों पर हमले की साजिश रची गई थी। इस बार जगुआर के बम डिस्पोजल स्क्वायड ने छिपा कर रखे गए पांच केन आईईडी बम बरामद किए थे। सभी बम दो-दो किलोग्राम के थे।

बचाव के लिए मुख्यालय जारी कर चुका है गाइडलाइंस
माओवादियों के द्वारा अपने प्रभाव वाले इलाकों सरायकेला-चाईबासा व खूंटी के ट्राइजंक्शन, गढ़वा-लातेहार के बूढ़ापहाड़ के इलाके, लोहरदगा के पेशरार, गुमला के कुरूमगड़ समेत कई इलाकों में आईईडी प्लांट किए गए हैं। एक व्यक्ति के वजन का हिस्सा भी इस आईईडी पर आने से धमाका हो जाता है।


हाल के दिनों में पुलिस मुख्यालय के स्तर से अभियान को लेकर गाइडलाइंस भी जारी की गई है। गाइडलाइंस के मुताबिक, अब हर नक्सल विरोधी अभियान में झारखंड जगुआर के बम डिस्पोजल स्क्वायड का होना अनिवार्य है, वहीं जवानों को हिदायत दी गई है कि अभियान के दौरान जब कच्ची सड़क या पगडंडियों से गुजरना हो तो वैसी जगह से दूर रहें, जहां कहीं मिट्टी खुदी हुई दिखे या गड्ढों को नया भरा गया जैसा दिखे।

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