पुलिस करीब 20 लाख रुपये के 166 मोबाइल बरामद कर लोगों को देने के मामले में सवालों के घेरे में है। मोबाइल बरामदगी के मामले में पुलिस अपनी ही लिखी पटकथा में फंसती नजर आ रही है। क्योंकि पुलिस ने जिन सात राज्यों से मोबाइल बरामद होने का जिक्र किया है। मोबाइल वहां कैसे पहुंचे, कौन लेकर गया और यह किन लोगों के पास थे, पुलिस के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है। मंगलवार को पुलिस की प्रेसवार्ता में बड़ा सवाल यह भी रहा कि मोबाइल जिन लोगों से बरामद किए हैं उन्हें पकड़ा क्यों नहीं गया। कहानी में झोल है।
साफ नहीं, पुलिस को कैसे मिले मोबाइल
पुलिस का दावा है कि एक इंस्पेक्टर और दो सिपाहियों को मोबाइल तलाशने में लगाया, लेकिन चार महीने में उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना के शहर हैदराबाद व अन्य शहरों से बरामदगी की बात कही जा रही है। वहां तो एक बार आने और जाने में ही छह से आठ दिन का समय लग जाता है।
जवाब नहीं: कौन लोग हैं जो बाहरी राज्यों में भेज रहे मोबाइल
शहर में खोए या फिर चोरी हुए मोबाइल बाहरी राज्यों को ही भेजे गए। सवाल यह है कि कौन लोग हैं जो शहर में मोबाइल चोरी करने के बाद बाहरी राज्यों के भेज रहे हैं। पुलिस अभी तक इन लोगों पास तक क्यों नहीं पहुंची। और जिन लोगों पास मोबाइल मिले उन्हें बारे में कोई जानकारी क्यों नहीं दे पाई।
सवाल: क्या सड़क से उठा लिए फोन
एसपी सिटी ने बताया कि मोबाइल बाहरी राज्यों से बरामद किए गए हैं, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ऐसा लग रहा है कि जैसे किसी ने मोबाइल सड़क पर रख दिए और पुलिस उठा लाई। इस तरह ही पटकथा लिखते समय विचार करना चाहिए था।
चोरों को मिल रही शह
पुलिस इस तरह से चोरी के मोबाइल बरामद कर चोरों के भविष्य को सुरक्षित कर रही है। इसमें अधिकतर लोगों के मोबाइल चोरी हुए थे, जिनकी गुमशुदगी दर्ज की गई। अब चोरों को छोड़ना फिर से चोरी को बढ़ावा देने के बराबर है।
खुद पीठ ठोक रही पुलिस
एसपी सिटी डॉ. जगदीश चंद्र ने प्रेसवार्ता में बताया कि चार महीने में खोए 682 मोबाइलों को सर्विलांस पर लगाया। जिसमें से 166 मोबाइल बरामद किए हैं। जिनकी कीमत करीब 20 लाख 30 हजार रुपये है।
