रायगढ़. जिले के धरमजयगढ़ रेंज अंतर्गत ओंगना और पोटिया के बीच घुमनारा जंगल के पास हाथियों का दल देखा गया है जिसमंे एक अकेला नर दंतैल हांथी दल से अलग थलग होने की जानकारी मिली है। दल से बिछडा हुआ हाथी दल की अपेक्षा ज्यादा खतरनाक होता है। इस वजह से क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वनांचल क्षेत्र धरमजयगढ़ में बढ़ते जंगली हाथियों की चिंघाड से पूरा क्षेत्र गूंजने लगा है। गांव के ग्रामीण इस चिंघाड से सहम कर घर में दुबकने पर मजबूर हो चुके हैं।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की शाम करीब 6 से 7 के बीच हांथियों की चिंघाड़ने की आवाज घुमनारा जंगल के पास गूंजने लगी। जिसे सुनकर काम से वापस घर लौट रहीं मजदूर महिलाएं खलबोरा अपने घर वापस जाने में डर से सहम गईं। क्योंकि हाथी उसी मार्ग पर मौजूद था, जिसकी आवाज सुनकर सड़क किनारे आवाजाही करने वाले भी थम गए।

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा कहा जाता है कि विभाग के द्वारा जंगली हाथियों पर नजर रखी जा रही है परंतु कई दफा देखा चुका है कि जंगली हाथियों गांव में घुसने के बाद भी न तो वन विभाग से कोई कर्मचारी गांव आते हैं और न ही हाथी मित्र दल के कोई सदस्य, शायद उन्हें गांव में हाथी घुसने की खबर नही मिल पाती। कल शाम ट्रेक्टर में सवार हो कर डरे सहमे वे सभी मजदूर व राहगीर खलबोरा गांव अपने घर के लिए लोग रवाना हुए। बताया जा रहा है अभी भी हांथी गांव किनारे जंगल मे विचरण कर रहे हैं।
हाथी की आमद को लेकर ग्रामीण जन बेहद चिंतित और दहशत में नजर आ रहे हैं। अब आगे वन विभाग के अधिकारी रेंज अफसर ग्रामीणों की सुरक्षा जंगली हाथियों से कैसे करेंगे ये देखने वाली बात होगी। अभी तक तो हाथी और मानव के बीच द्वंद को रोकने वनविभाग के सारे कवायद विफल ही होते आए हैं। जंगली हाथियों की लगातार बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। चूंकि धरमजयगढ़ रेंज के एक दर्जन से अधिक गांव में जंगली हाथियों का आंतक अत्याधिक है। इन गांवों में सुबह व शाम जंगली हाथियों के चिंघाड से पूरा क्षेत्र गूंजते रहता है। हाथियों के भय से ग्रामीण घर में दुबपने को मजबूर हो गए हैं
