शशिकांत कोन्हेर की रिपोर्ट
00 मंडी में बोरा नहीं होने का हवाला देकर किसानों को रोका जा रहा है
जांजगीर-चांपा। जिले के किसान धान बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। मंडी के कर्मचारी बोरा नहीं होने का हवाला देकर टोकन नहीं काट रहे। वही जिन किसानों के टोकन कट गए हैं उन्हें बोरा नहीं होने की बात कहकर धन लाने से रोका जा रहा है। जिले के नवागढ़ ब्लाक के गोधना धान खरीदी केंद्र में भारी अव्यवस्था का आलम है। एक और भूपेश सरकार किसानों के हितैषी होने की बात कह रही वही अपने मेहनत की फसल बेचने के लिए किसान चक्कर काट रहे। किसानों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार किसान के हितैषी हैं या विरोधी ।किसान जुट बोरा नही होने की स्थिति में प्लास्टिक बोरा में धान देने तैयार हैं, किंतु मंडी ऊपर से आदेश नहीं होने की बात कहकर प्लास्टिक बोरी में धान नहीं ले रही है। 31 जनवरी तक होने वाली खरीदी में आलम यह है कि पिछले डेढ़ माह से किसानों का फसल धूप में बाहर रखा हुआ है जिसके कारण सुखात बढ़ रहा है। इसके कारण वजन में भारी नुकसान होरहा है। पूर्व में रकबा में कटौती की गई। रकबा सुधार करवाने के लिए किसानों को चक्कर लगाना पड़ा। इसके बावजूद सभी के में सुधार नहीं किया गया। जिला में किसान चौतरफा नुकसान झेलने के लिए मजबूर हैं। सरकारी मंडी में बोरा नहीं मिलने से बाजार में बोरा बेचने वालों की चांदी हो गई है। 10 ₹12 का बोरा वर्तमान में 40 से ₹50 में बेचा जा रहा है। ऐसे में किसान जुट बोरा खरीद पाने में भी असमर्थ है ।जिम्मेदार अधिकारियों को इस दिशा में त्वरित कार्रवाई कर किसानों को राहत पहुंचाना चाहिए ताकि सरकार की छवि अच्छी बन सके। यह स्थिति जिला के सिर्फ गोधना मंडी की नही है बल्कि सभी जगह यही हाल है।
