यहां के कंकर-कंकर में हैं शंकर, जानें क्या है इस गांव से भगवान शिव का रिश्ता

by Kakajee News

सावन के महीने को भगवान शिव की उपासना का माह कहा जाता है। इस माह में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। सावन में महत्वपूर्ण होता है कि अपने हाथ से भगवान शिव को जल चढ़ाया जाए। आज इसी सावन के पर्व पर हम आप को बताएंगे कि मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आने वाले एक गांव बकावां का भगवान शिव से क्या नाता है। दरअसल आप जिस शिवलिंग की पूजा करते है। उन्हें यहीं गढ़ा जाता है। यहां के तैयार शिवलिंग देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेश तक भेजे जाते हैं।

खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर नर्मदा के तट पर बसा है बकावां गांव। इस गांव की यही सबसे बड़ी खूबी है कि यहाँ गली-गली में शिवलिंग गढ़े जाते हैं। नर्मदा के निर्जीव पत्थरों को तराशरकर उन्हें सजीव शिवलिंग की सूरत देने वाले इस काम में एक दो परिवार नहीं बल्कि आधे से अधिक गांव जुटा रहता है। इस गांव के 100 से भी ज्यादा परिवार शिवलिंग का निर्माण कर अपने परिवार की गुजर-बसर करते हैं। गांववासियों का मानना है कि नर्मदा के कंकर भी शंकर के सामान हैं, इसलिए हम उन्हें तराश कर देवों के देव महादेव के शिवलिंग के रूप में ढाल देते हैं।

खरगोन के बकावां में रहने वाले लोग शिवलिंग ताराशने का काम तक़रीबन 150 साल से कर रहे हैं। ग्रामवासियों का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां यही काम कर रही हैं। शिवलिंग का निर्माण करने वाले शिवनारायण नामदेव बताते हैं कि होल्कर घराने की शिव भक्त अहिल्याबाई होल्कर के लिए यहां के पत्थर को ताराश कर पहला शिवलिंग बनाया गया था। इसके बाद यह परिपाटी ही शुरू हो गई और ग्रामीणों ने इस काम को व्यवसाय के रूप में स्थापित कर दिया। अब यहां के बने शिवलिंग देश ही नहीं विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं।

यहां 1 इंच से 27 फीट तक के शिवलिंग गढ़े जाते हैं। इनकी कीमत दस रुपये से लेकर चार लाख रुपये तक है। यहां के पत्थरों की खासियत यह है कि कटिंग के बाद शिवलिंगों पर ओम, तिलक, सहित अन्य धार्मिक आकृतियां स्वत: ही उभरती है, जो खरीदारों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाती है। ओम आकृति वाला शिवलिंग ऊंचे दामों पर बिकता है।

देवास जिले से आए एक खरीदार भगीरत पटेल ने बताया कि हमने खरगोन के बकावां में बनने वाले शिवलिंग का नाम सुना था। देवास की कन्नोद तहसील के ग्राम चापड़ासा में एक शिव मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। हम यहां से शिवलिंग ले जाकर वहां इसकी स्थापना करेंगे।

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