जांच के नाम पर मरीजों से हो रही है खुली लूट, स्वास्थ्य विभाग को नही है कोई खबर, खुलेआम अवैध लूट के मामले में नही होती कोई कार्रवाई

by Kakajee News

रायगढ़. बुजुर्ग कहते थे कि राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट अंत काल जब पछतायेगा जब प्राण जायेगा छूट, यह चैपाई बुजुर्गो ने धार्मिक ग्रंथ रामायण को पढ़कर को बचपन से बच्चों को सुनाई थी लेकिन अब यह मात्र केवल सुनने मात्र मंे अच्छी लगती है पर हकीकत में आज भी इलाज व जांच के नाम पर मरीजों के जेबों पर खुली डकैती होनें के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग ने मौन वत्र साध लिया है। यह हम नही कहते कोतरा रोड़ में महंगी जांच की दुकान खोलकर रोजाना लाखों कमाने वाले भेडिया का काम है जिसे कोई रोक नही पा रहा है।

कहनें को तो लगातार महंगी जांच के नाम पर मरीजों को तत्काल इलाज की जानकारी मिल जाती है। लेकिन बेचारे मरीजों को यह नही मालूम की जो जांच कराने के लिये संबंधित डाक्टर अपने कमीशन के लालच में डाक्टर भेडिया जो कोतरा रोड़ इलाके में बड़ी दुकान खोलकर बैठा है वहां उसकी जेब पर ऐसा डाका पडता है कि जिसकी जानकारी होनें के बाद भी वह चुप्पी साध लेता है चूंकि उसे मालूम है कि अगर वह अवैध लूट की शिकायत करता है तो जिले में कोई भी बड़े अधिकारी उनकी बात पर पहल करना तो दूर सुनेगा भी नही। रोजाना कोतरा रोड़ इलाके में अलग-अलग डाक्टरों के माध्यम से मरीजों की कतार यहां थ्री डी फोर डी के अलावा पता नही कितने डी की जांच होती है और डी का मतलब आप जान लें कि डिफाल्टर ही होगा लेकिन यहां तो इन जांचों के नाम पर गड्डी मायने रखती है।

जानकार सूत्र बताते हैं कि यहां जिस जांच के नाम पर मोटी रकम ली जाती है उसकी रसीद तक मरीजों को या उनके परिजनों को नही दी जाती और दी भी जाती है तो वसूली गई रकम से आधे से भी कम की थमा दी जाती है। इतना ही नही कथित डाक्टर भेडिया इस पूरे मामले में सामने तक नही आता और उनसे कोई बात करना चाहे तो उनका मोबाईल फोन पीए उठाते हैं। हाल ही में हमने इस पूरे मामले में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से बात की थी और उन्होंने इस बात को माना था कि अगर कोई भी महंगी जांच निजी क्लीनिक चाहे वो कोतरा रोड के डाक्टर भेडिया का हो या अन्य किसी क्लीनिक का उसे शासन द्वारा निर्धारित जांच की ही वसूली करनी होगी अगर ज्यादा राशि ली जाती है तो वह अवैध है और शिकायत करने पर कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि डाॅ. केसरी रायगढ़ से कोरबा स्थानांतरित हो चुके हैं लेकिन कोतरा रोड़ के बड़े क्लीनिक संचालक वहां आने वाले डाॅक्टरों तक को नही बख्स रहे हैं। पीड़ित डाक्टर ने हमे बताया कि पीठ इलाज के नाम पर उसकी जांच के नाम पर 8 हजार रूपये ले लिये गए और जो रसीद दी गई उसमें संबंधित क्लीनिक के उपर की पूरी जानकारी न देकर हल्के पन्ने की पीली रसीद 6 हजार रूपये की थमा दी गई। साथ ही साथ रिपोर्ट के समय मंे भी कई कोताही बरती गई।

अब आप समझ जायेगे कि जब संबंधित डाक्टर भेडिया डाक्टर को ही जांच के नाम पर नही बख्स रहा तो वह अपनी सेटिंग के माध्यम से रोजाना कितनी कमाई करता होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर यही कोई अवैध कृत्य दूसरा करता है तो छापामार दस्ता बिना समय गंवाए पहुंच जाता है पर ऐसे मामले में उनकी टीम पता नही कौन से डर से यहां झांकने तक नही आती। बहरहाल लूट का सिलसिला लगातार जारी है और यह कब थमेगा इसका जवाब हमारे पास नही बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों का है जो गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों की जेबों पर पड़ते डाके को रोक सकते हैं।

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