नरेश शर्मा रायगढ़
रायगढ़। कहते हैं कि जिस तरह घर की बंद घड़ी घर के लिये अपशगुन मानी जाती ठीक उसी तरह रायगढ़ के घड़ी चौक में लगी घड़ी भी लंबे समय से खराब चल रही है और इससे लगता है कि शहर की दशा व दिशा दोनों ठीक नही है। न तो राजनीतिक स्तर पर और न ही भ्रष्टाचार के स्तर पर साथ ही साथ प्रदूषण के मामले में तो कुछ बोलना और लिखना दुष्कर होगा। बंद पड़ी घड़ी का ध्यान अभी तक किसी को नही आया है। जिससे जनता को समझ लेना चाहिए कि वे भी अपने हाल पर हर सितम बर्दाश्त करते चलें। बस इतना सावधान रहें कि शहर की खराब सड़कें व आबो हवा उनके लिये ज्यादा हानिकारक न हो।
नही है शहर में कुछ भी ठीक
रायगढ़ नगर निगम द्वारा लगाई गई घड़ी चारो दिशाओं में शहर की जनता को सही समय बताने के लिये लगाई गई थी लेकिन अब यह घड़ी शायद किसी काम की नही रही है और इसका महत्वपूर्ण कारण यह है कि निगम में हो रही राजनीतिक उठापटक के चलते इस ओर किसी का ध्यान नही जा रहा है। कहने को तो शहर विकास के लिये एक मील का पत्थर साबित होनें वाला घड़ी चैक अपनी पहचान खो चुका है। जिसके कारण इस पर सवाल नही उठ रहे हैं। अगर हम शहर की बात करें तो यहां की जर्जर सड़कें, बढ़ती दुर्घटनाएं और बजबजाती नालियां अब यहां की पहचान बन चुकी है। हाल ही में नये कलेक्टर तारण सिन्हा ने शहर का कुछ उद्वार करने के लिये ठोस कदम उठायें है, लेकिन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती सड़के बनने के बाद रातो रात नलों के लिये खोदना आम बात हो चुकी है।
घड़ी चौक की चारों घडियां महीनों से है बंद
यूं तो रायगढ़ शहर में भी प्रदेश के अन्य शहरों की भांति शहर के जीरो पाइंट सत्तीगुड़ी चौक व हंडी चैक के मध्य रामलीला मैदान के पास नगर निगम द्वारा लाखो रूपये खर्च करके बनवाये गए घडी चौक की घड़ी एक लंबे अर्से से खराब हो गई। इसके बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा अब तक इसे सुधरवाने की कोई पहल नही की गई है। शहर के सौंदर्यीकरण के मद्देनजर राजधानी रायपुर की तर्ज पर शहर के रामलीला मैदान के पास घड़ी चौक का निर्माण कराया गया था, यह चौक बहुत कम समय में रायगढ़ की नई पहचान बन गई थी। वर्तमान में समय में रायगढ़ घड़ी चौक की घड़ी चारो दिशाओं के लिये अलग-अलग समय बता रही है। सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि इस मामले में न तो महापौर का ध्यान जा रहा है न ही सभापति का और न स्थानीय पार्षद का। विधायक का तो इससे शायद कोई लेना देना नही है। जनता रोज देखती है कि यहां से उनकी सायरन बजाती गाड़ियां निकलती जरूर है, पर उनकी नजर क्या इन घडियों पर नही जाती।
शहर की बदल चुकी है दशा व दिशा
इस पूरे मामले में हमने अलग-अलग लोगों से बात की तो सांस्कृतिक नगरी के शांत नागरिक अपने ही अंदाज में बताते हैं कि अब इस मुद्दे में बोलना अपनी ही खिल्ली उडाना है क्योंकि जब यहां की घड़ी की यह हालत है तो हमारी हालत कैसी होगा इसका अंदाजा यहां की सडकों व बजबजाती नालियांे के साथ-साथ बढ़ते प्रदूषण से लगाया जा सकता है कि हालत कैसी होगी। वे बताते हैं कि दिन में उठते ही खखार के साथ प्रदूषण उनके सीने तक पहुंचता है और शहर की सड़कों की धूल रोज चेहरे पर जम जाती है। और जब देर रात घर पहुंचते हैं तो भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं कि वे सकुशल घर आ गए।
उद्योग विकास विकास की पहचान है या विनाश की
एक बात बार-बार कही जाती है जिस जिले में उद्योग घराओं की आवाक होती है तो वहां विकास के नये आयाम स्थापित होते हैं लेकिन हम यह सोंचने पर मजबूर है कि रायगढ़ को किसकी नजर लग गई जहां विकास की बजाए केवल विनाश ही विनाश दिखता है। न तो यहां का पानी साफ है न यहां अच्छी सड़कें है और न ही कोई ऐसा बड़ा विकास हुआ है जिसको लेकर यहां की जनता को गर्व हो। हां इतना जरूर है कि बेरोजगारी चार गुनी बढ़ गई है और बाहर से आये लोग शहर के युवाओं को चिढ़ाते हैं कि देखिये आपके शहर में हम नौकरी कर रहे हैं और आप लोग राजनीतिक पहुंच वाले लोगों की राजनीति की भेंट चढ़ चुके हैं। कटते पेड़ रोजाना बढ़ते उद्योग विकास के घोतक हैं या विनाश के यह तो दिख रहा है।
बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं बना रही है रिकार्ड
शहर की सड़कें हो या बाहर की कहीं भी लगता नही कि हम विकास की सड़क पर चल रहे हैं या जर्जर सड़क पर, यहां पर दौड़ती गाड़ियों से रोजाना मौतों का आंकडा, दिन दुनी रात चैगुनी की रफ्तार से बढ़ रहा है। रोज एक घर का चिराग सड़क दुर्घटना की बलि चढ़ रहा है लेकिन विडंबना देखिये इन्हें रोकने के लिये अभी तक कोई ठोस योजना नही बनी है। कोयले के लिये दौडते वाहन अब मौत के वाहन बन चुके हैं और शहर में तो दुर्घटना एक ऐसी पहचान बन चुकी है जिसके लिये जनता कहती है कि हम अगर सही सलामत घर पहुंच जाएं तो भगवान का शुक्रिया मनाते है।
बजबजाती नालियां व जगह-जगह कचरा
नगर निगम के द्वारा स्वच्छता रैकिंग में जहां अंक बढ़ाने लाखों रूपये खर्च कर शहर की प्रमुख सड़कों की ही सफाई कर अपने कर्तव्र्यो की इतिश्री कर ली जाती है वहीं इसके अलावा शहर के हर वार्डो में बजाती नालियां व कचरा का ढेर आसानी से देखा जा सकता है। इसी गंदगी की वजह से शहर में हर साल डेंगु के मामले सामने आते रहे हैं, निगम के जिम्मेदारी अधिकारी को इस ओर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है।
वो कहते हैं न कि कलमकार अगर सही हो तो वह किसी राजनीतिक दल की चापलूसी नही करता, साथ ही साथ वह शहरवासियों के लिये उन बातों को लिखकर सामने आता है जिनका जनता से सरोकार हो और हमने भी शहर की बंद पड़ी घडी को देखकर अपनी कलम का रूख उन राजनीति करने वालों के उपर कर दिया है जो शहर की जनता को चुनाव के समय विकास के सपने दिखाकर उनके जजबातों से खेलते हैं साथ ही साथ जब समय निकल जाता है तो उन्हें अपने हाल पर छोड़ देते हैं यही हाल अब रायगढ़ शहर का हो चुका है। चूंकि इसका वक्त घड़ी की तरफ खराब चल रहा है।
