सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के नवगठित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में राष्ट्रीय पशु शेर का शिकार करने का मामला आमने आया है। इस घटना के बाद वन विभाग की टीम ने शिकार के 6 दिन बाद 5 आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया है। आरोपियों के द्वारा जंगली सुअर के शिकार के लिए विद्युत प्रवाहित तार बिछाया गया था, जिसके चपेट में शेर आ गया और उसकी मौत हो गई। यह बाघ बीते एक माह से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभ्यारण्य में विचरण कर रहा था। बीते एक माह के भीतर उसने नील गाय सहित अन्य जानवरों का शिकार किया था और वन विभाग इसके मूवमेंट को कैद करने के लिये टैªपिंग कैमरों के जरिये नजर रख रहा था। शेर के शिकार का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की टीम ने इसे पहले तो छुपाने का प्रयास किया लेकिन बाद में पांच शिकारियों को वन्य अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है। वन विभाग के अनुसार यह शेर जिले की सीमा से लगे ओडिसा के जंगलों से इस गोमर्डा अभ्यारण्य में आ गया था।
रायगढ़ जिले सहित सारंगढ़-बिलाईगढ़ इलाके में जंगली जानवरों के शिकार की घटनाएं लगातार सामने आते रही है और सबसे ज्यादा घटनाएं तो जंगली हाथियों के मामले हैं बावजूद इसके वन विभाग ऐसे अवैध शिकार पर कोई बड़ी कार्रवाई नही कर पाता जिसके कारण अब शिकारियों ने सीधे राष्ट्रीय पशु शेर का शिकार करके विभाग को चुनौती दे दी है। जंगलों में अवैध विद्युत कनेक्शन के जरिये तार बिछाकर जंगली सुअर सहित अन्य जानवरों के शिकार करने वाले शिकारी वन विभाग के कर्मचारियों से मिली भगत करके लगातार अवैध शिकार करते आ रहे थे।
शेर के विचरण करने के निशान मिटने के बाद जागा वन विभाग
सारंगढ़ के गोमर्डा अभ्यारण्य में दिसम्बर माह में क्षेत्र के जंगल मे एक नग बाघ को विचरण करते देखा गया था। जिसके बाद वन विभाग के द्वारा कैमरा ट्रैप लगाकर तथा STPF (Special Tiger Protection Force)का गठन कर उक्त बाघ का सतत् निगरानी की जा रही थी। साथ ही लगातार मॉनिटरिंग एवं ट्रैकिंग किया जा रहा था। इसी बीच 12 जनवरी के पश्चात् इसके जंगल मे बाघ के फूटप्रिंट नहीं मिलने के कारण वन विभाग को हुई शंका के आधार पर विभाग ने अपने मुखबीरों को अलर्ट कर पता साजी चालू कर दिया गया। जिसके तहत 24 जनवरी को मुखबीरों से प्राप्त सूचना के आधार पर पहले 03 आरोपियों को पकड़ा गया जिनके द्वारा पूछताछ में बताया गया कि जंगली सुअर का शिकार करने के लिए लगाये गये बिजली तार में एक नग बाघ की मृत्यु हो गई है। पकड़े जाने के डर से शिकारियों ने बाघ के शव को नजदीक जंगल में लात नदी के किनारे दफना दिया था।
दफनाये गए स्थान से मिला बाघ का कंकाल
सारंगढ़ वन मंडल की टीम, एसटीपीएफ एवं वन विभाग के डॉग स्कवॉड के द्वारा आरोपियों द्वारा शव को दफनाये गये स्थान का मुआयना कर एक नग बाघ का कंकाल खोज निकाला। साथ ही साथ डॉग स्कवॉड द्वारा आरोपियों के घर में छापामारी की कार्यवाही की गई जिससे शिकार करने में प्रयुक्त बिजली के तार एवं अन्य शिकार संबंधित सामग्री का जब्ती किया गया एवं अन्य 02 आरोपियों को भी पकड़ा गया।
शेर का किया गया अंतिम संस्कार
NTCA की Standard Operating Procedure (SOP) अनुसार शव परीक्षण हेतु पशु चिकित्सकों की समिति का गठन किया जा कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक छ०ग० एवं मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) बिलासपुर, वनमंडलाधिकारी सारंगढ़ बिलाईगढ़, NTCAके नामित प्रतिनिधि, अधीक्षक गोमर्डा अभ्यारण्य सारंगढ़, स्थानीय जन प्रतिनिधियों तथा वन विभाग के अधिकारियोध्कर्मचारियों की उपस्थिति में विधिवत शव परीक्षण किया जाकर शव को नियमानुसार जलाया गया। शव परीक्षण के दौरान उक्त बाघ के सभी अंग सही सलामत पाया गया एवं नमूना सैम्पल जांच हेतु भेजा गया।
शिकार के बाद वन विभाग के छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज
गोमर्डा अभ्यारण्य से लगे जंगलों में शिकारियों द्वारा करंट प्रवाहित तार बिछाकर शेर का शिकार करने के मामले में वन विभाग ने छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके पूरे मामले को रफा-दफा करने का भी प्रयास किया। एक जानकारी के अनुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा वन्यप्राणियों के संरक्षण हेतु उचित मार्गदर्शन देते हुए उक्त प्रकरण में सख्त कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। जिसमें प्राथमिक जांच के आधार पर त्वरित कार्यवाही करते हुए वन विभाग द्वारा विद्युत तार के संबंध में लापरवाही बरते गये परिसर रक्षक को निलंबित किया गया तथा संबंधित परिक्षेत्र सहायक और प्रभारी परिक्षेत्राधिकारी को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। साथ ही साथ संबंधित प्रकरण के पांचों अपराधियों को वन विभाग द्वारा पी.ओ.आर.जारी कर गिरफ्तार करते हुए न्यायिक रिमांड में जेल भेजा गया है।
5 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
बाघ के शिकार का मामले में वन विभाग द्वारा गिरफ्तार किये गये 05 आरोपियों में सीताराम वल्द विद्याधर सिदार (उम्र 33 वर्ष), रामचरण वल्द जन्मजय बरिहा (उम्र 48 वर्ष), सहदेव वल्द सुवन बरिहा (उम्र 35 वर्ष), बंशीलाल वल्द कैतराम बरिहा (उम्र 63 वर्ष) ग्राम घोराघांटी, जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ के निवासी है तथा धनुराम उर्फ भुनेश्वर साहू वल्द विलाल साहू (उम्र 35 वर्ष) ग्राम सालर, जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ के निवासी है।
विभाग के द्वारा बरती जाती है लापरवाही
एक अन्य जानकारी के अनुसार गोमर्डा अभ्यारण्य के घने जंगल मे कई प्रकार के वन्यप्राणी विचरण करते हैं, वन विभाग की लापरवाही की वजह से इस क्षेत्र में शिकारियों के द्वारा एक लंबे अर्से से वन्यप्राणियों का अवैध तरीके से शिकार किया जाता रहा है। जिनमें नील गाय, भाल, जंगली सुअर, खरगोश, चीतल, सांभर के अलावा अन्य जानवरों के शिकार तो होते ही रहे हैं और कुछ मामलों में वन विभाग ने कार्रवाई भी की पर लगातार सक्रिय शिकारियों के समूह ने आखिरकार शेर को ही मौत की नींद सुला दिया। जिसके बाद वन विभाग अब नये सिरे से जंगलों में रहने वाले जानवरों की सुरक्षा करने का दावा कर रहा है।
