जमीन का मुआवजा लेने के लिये पति-पत्नी ने जमीन में लोटते हुए कलेक्टर के पास पहुंचे, मांगा मुआवजा, फिर मिला आश्वासन

by Kakajee News

सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के नवगठित सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है जब पति-पत्नी करीब दो सौ मीटर से जमीन पर शाष्टांक लेटते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर से मिलने पहुंचे और बरसो पहले एक बांध में डूबान के गई उनकी जमीन का मुआवजा देने की गुहार लगाई। अपने तरह के नये तरीके से दोनों पति-पत्नी कई सालों से अपनी जमीन का मुआवजा मांगने के लिये आवेदन पर आवेदन देते आ रहे हैं और अब इन दोनों ने गांव से पहुंचकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचने से पहले करीब दो सौ मीटर दूर से सड़क पर लेटते हुए अपना मांग पत्र कलेक्टर के पास दिया। शाष्टांक जमीन पर लेटकर जाने का नजारा आम तौर पर नवरात्रि या अपनी मुराद पूरी होनें पर भक्त द्वारा पूरा किया जाता है लेकिन जमीन के मुआवजे के लिये इस तरह जमीन पर रेंगते हुए कलेक्टर तक पहुंचना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

13 सालों से परेशान है परिवार
जिला मुख्यालय सारंगढ़ में कलेक्टर जनदर्शन में अनोखे तरीके से अपनी जमीन के बदले मुआवजा मांगने वाला दंपत्ति जोड़ा 13 सालों से लगातार आवेदन देते हुए यह मांग कर रहा है कि उसकी जमीन सोनिया जलाशय योजना के डूबाने क्षेत्र में चली गई है और उसका मुआवजा उन्हें मिलना था, लेकिन सरकारी सिस्टम के कारण वह लगातार चक्कर पे चक्कर लगा रहा है। फिर भी उन्हें मुआवजा नही मिला है। ऐसे में उन्होंने फिर से यह प्रयास करते हुए जमीन पर लेटते हुए कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन देकर गुहार लगाई है कि उन्हें अपनी बेशकीमती जमीन का मुआवजा दिया जाए, ताकि उनकी उजडी हुई गृहस्ती फिर से गुलजार हो सके। इतना ही नही पीड़ित दंपत्ति जितने भी आवेदन दिये थे उनका निराकरण आज तक नही हुआ है।

सीने में आवेदनों को चिपकाकर पहुंचे थे दोनों पति पत्नी
अपनी जमीन का मुआवजा मांगने पहुंचे पति-पत्नी के इस अनोख प्रदर्शन में सबसे बड़ी बात यह थी कि 13 सालों के भीतर जितने भी आवेदन कलेक्टर कार्यालय के अलावा अन्य अधिकारियों व मंत्रियों को भेजे थे वो सभी अपने सीनें में चिपकाकर ये दंपत्ति कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे थे। इतना ही नही जमीन पर पहले पति उसके बाद पत्नी शाष्टांक लेटते हुए कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचे और इस दौरान किसी ने इन्हें ऐसा करने से रोका तक नही। पीड़ित पति-पत्नी चाहते हैं कि इनकी मांग को जल्द से जल्द पूरा करने की पहल हो चूंकि वे आवेदन पे आवेदन देकर थक चुके हैं और अब उनका हौसला भी टूटते जा रहा है। पति-पत्नी सारंगढ़ से लगभग 35 किलोमीटर दूर ग्राम टुंड्री से जिला मुख्यालय पहुंचे थे और सोनिया जलाशय में इनकी दस डिसमिल से अधिक जमीन अधिकृत कर ली गई थी जिसका मुआवजा उन्हें बीते 20 सालों से नही मिला है।

आत्मदाह की भी दी जा रही धमकी
अपनी जमीन के बदले मुआवजा मांगने वाले ग्राम टुंड्री निवासी घनश्याम श्रीवास का कहना है कि इस बार के आवेदन पर अगर जिला कलेक्टर कार्यालय से पहल नही होती तो वे पति-पत्नी के साथ राजधानी जाकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी गुहार लगायेंगे और वहां उनकी नही सुनी जाती तो दोनों आत्मदाह कर लेंगे। इस चेतावनी के पीछे पति-पत्नी का दर्द सामने दिख रहा था, चूंकि शासन के नियमानुसार जलाशय या अन्य शासकीय निर्माण में किसी की जमीन ली जाती है तो नियमानुसार मुआवजा की राशि साल दो साल के भीतर दे दी जाती है। लेकिन पीड़ित घनश्याम श्रीवास की मानें तो लगातार भटकने के बाद भी उनके जिंदगी के कई साल मुआवजे की आस में गुजर गए और अब जान देने के सिवा कोई चारा नही बच रहा।

क्या कहते हैं अधिकारी
सोनिया जलाशय योजना के डूबाने क्षेत्र ग्राम मलुहा का आवेदन मिला है। हमे इसकी जानकारी मिली है इस पर जल्द ही नियमानुसार कार्रवाई करेगें।

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