निकाय चुनाव में कमल खिलाने को लेकर क्या भाजपा की टीम है एकजुट, निर्दलीयों के साथ जयचंद कितना पहुंचायेंगे नुकसान

by Kakajee News

रायगढ़. नगरीय निकाय चुनाव के कुछ ही दिन शेष हैं और भाजपा कांगे्रस के साथ-साथ बसपा और निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपना चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। बीते कई चुनाव की बात करें तो इस बार का नगर निगम चुनाव बहुत मायने में खास है चूंकि चाय वाले की लडाई किराना दुकान चलाने वाली महिला से है और बीच में इंजीनियर, पूर्व महापौर के अलावा अन्य संस्था से जुड़े प्रत्याशी इसे रोचक बना रहे हैं। मजेदार बात यह भी है कि रायगढ़ विधायक व प्रदेश के वित्त मंत्री के साथ जुटी टीम चाय वाले को जीताने में तो लगी है लेकिन अंदर ही अंदर पार्टी के कुछ जयचंद बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने के लिये भी लग हुए हैं। यहां यह कहने में गुरेज नही है कि पार्टी के कथित वो चेहरे जो अपने आपको पार्टी लाइन से उठकर सर्वमान्य नेता मानते हैं वे ही कुछेक चेहरों को लेकर चुनाव प्रचार में लगे तो जरूर है पर उनकी रणनीति से नुकसान पार्टी को ही हो रहा है।

नगरीय निकाय चुनाव में सात महापौर प्रत्याशी और 48 वार्डो में भाजपा और कांगे्रस के साथ-साथ अपने दलों से बगावत करके मैदान में उतरे वे नेता भी पूरा जोर लगा रहे हैं जिन्हें मालूम है कि वार्ड में कैसे जीत हासिल की जाती है। कहने को तो यहां भी भाजपा के नेता दावा कर रहे हैं इस बार निगम में भाजपा का महापौर व सर्वाधिक संख्या भाजपा के पार्षदों की होगी लेकिन बिखरी हुई कांगे्रस के वे नेता जो चुपचाप हर बार चुनाव जीतकर नगर निगम पहुंचते हैं उन्हें हराने के लिये भाजपा के पास कोई नीति नही है और यही कारण है कि चाय वाले को महापौर बनाने के लिये पार्टी स्तर पर धन, बल के साथ-साथ अन्य संस्थानों का खुला उपयोग हो रहा है। पर जयचंदो के चलते नुकसान भी जमकर हो रहा है।
जानकार सूत्र बताते हैं कि भाजपा के भीतर मीडिया में स्वयंभू नेता बनने वाले कुछ लोग नही चाहते कि उनका कद घटे और यही कारण है कि अपने कद को बढ़ाने के लिये वे पार्टी के अनुशासन को ही अलग रखकर नगरीय निकाय चुनाव में जिस प्रकार चुनाव प्रचार कर रहे हैं उससे नुकसान भाजपा को ही हो रहा है।

विकास के नाम पर किये जा रहे चुनाव प्रचार में सबसे बड़ी बात यह भी है कि रायगढ़ जिले के पत्रकारो के लिये दोनो ही पार्टीयों ने कोई घोषणा नही की है, बीते कई दशकों से जिले के पत्रकारों के लिये न तो कोई सर्व सुविधायुक्त प्रेस क्लब भवन है और न ही अधिकांश पत्रकारों के लिये आवासीय व्यवस्था। बडे-बड़े वादे के जरिये करोड़ो रूपये खर्च का दावा करने वाले मंत्री व नेता तथा पूर्व नेता जिस प्रकार पत्रकारों को दरकिनार कर रहे हैं उसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। बहरहाल देखना यह है कि जैसे-जैसे मतदान की तिथि पास आ रही है वैसे-वैसे चुनाव शोर हर गली में बढ़ते जा रहा है पर इस शोर के पीछे छुपे चोर इसमें सेंध लगाकर बडा नुकसान कर रहे हैं जो आने वाले परिणाम के सामने दिखाई देगा।

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