धमतरी। हाथी संरक्षण एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में पिछले लगभग 8 वर्षों से निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हाथी शुभचिंतक वैभव जगने अपने मित्र प्रेम शंकर चौबे के साथ मिलकर लगातार हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी सहअस्तित्व को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने तथा हाथियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का कार्य किया जा रहा है।
पिछले वर्ष वैभव जगने की पहली पुस्तक “मैं हाथी हूँ” प्रकाशित हुई थी। इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने हाथियों की पीड़ा, उनके संघर्षपूर्ण जीवन और संरक्षण की आवश्यकता को समाज के सामने रखने का प्रयास किया था। पुस्तक को वन्यजीव प्रेमियों एवं जागरूक नागरिकों द्वारा सराहा गया।
अब वैभव जगने अपनी दूसरी पुस्तक “हाथी मित्र दल” लिखने की तैयारी कर रहे हैं। यह पुस्तक उन समर्पित सदस्यों की निस्वार्थ सेवा, संघर्ष, समर्पण और हाथी संरक्षण के प्रति उनके योगदान पर आधारित होगी, जो वर्षों से हाथियों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं।
वैभव जगने का कहना है कि हाथी मित्र दल के सदस्यों की सेवा और समर्पण को शब्दों में संजोना आवश्यक है, ताकि समाज उनके योगदान को समझ सके और वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रेरित हो सके। संभावना है कि यह पुस्तक इस वर्ष के अंत तक अथवा अगले वर्ष पाठकों के बीच उपलब्ध होगी।
