RAIGARH NEWS : 17 साल पुराने दुकान आबंटन विवाद में कोर्ट सख्त, सरपंच-सचिव समेत तीन पर FIR दर्ज करने का आदेश

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रायगढ़। जिले के घरघोड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुडुमकेला में गरीबी उन्मूलन योजना के तहत बने नाई और धोबी दुकान के आबंटन को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। करीब 17 साल पुराने इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी घरघोड़ा ने सरपंच, सचिव और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं।

मामले के अनुसार, ग्राम कुडुमकेला निवासी रविशंकर श्रीवास ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले बीपीएल हितग्राहियों के लिए नाई एवं धोबी दुकान का निर्माण कराया गया था। पंचायत द्वारा 20 अप्रैल 2009 को सहमति पत्र जारी कर नाई दुकान उन्हें आबंटित करने की सहमति दी गई थी।

परिवादी के अनुसार, पंचायत की सहमति के बाद वह दुकान शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इसी बीच गांव के ही सुंदरलाल श्रीवास ने विवाद खड़ा कर दिया और पंचायत सचिव के सहयोग से कथित तौर पर दुकान पर कब्जा कर लिया। इसके बाद रविशंकर श्रीवास ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की।

जांच में यह सामने आया कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत घरघोड़ा ने वर्ष 2010 में ही पंचायत को आदेश जारी कर सुंदरलाल को किया गया आबंटन अवैध बताते हुए निरस्त करने और पात्र हितग्राही को दुकान सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद पंचायत द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया। बाद में कई स्मरण पत्र भी जारी हुए, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।

मामला उपसंचालक पंचायत एवं समाज कल्याण रायगढ़ तक पहुंचा, जहां से भी विधिवत आबंटन के निर्देश दिए गए। वर्ष 2019 और 2020 में भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के आदेश जारी हुए, लेकिन कथित रूप से जिम्मेदारों ने निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया।

आखिरकार लंबे इंतजार और प्रशासनिक उदासीनता के बाद पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री दामोदर प्रसाद चन्द्रा ने 28 अप्रैल 2026 को परिवाद स्वीकार करते हुए ग्राम पंचायत कुडुमकेला के सरपंच, सचिव और सुंदरलाल श्रीवास के खिलाफ अपराध दर्ज कर अग्रिम जांच करने के निर्देश दिए हैं।

इस आदेश के बाद गांव में एक बार फिर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे परिवादी को कब राहत मिलती है।

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Author: kakajee

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