रायगढ़। कल मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के जिला रायगढ़ प्रवास कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने के पश्चात बुधवार शाम पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज, राम गोपाल गर्ग ने पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना एवं चौकी प्रभारियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले की कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विवेचना की गुणवत्ता को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान आईजीपी ने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के कुशल नेतृत्व में रायगढ़ पुलिस सराहनीय कार्य कर रही है, लेकिन बदलते दौर की चुनौतियों को देखते हुए पुलिसिंग को और अधिक प्रोफेशनल, तकनीक आधारित एवं परिणाममुखी बनाना होगा।
बैठक में श्री गर्ग ने बताया कि भारत सरकार द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के विभिन्न पैरामीटरों पर सभी राज्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है। ऐसे में प्रत्येक जिले को अपने प्रदर्शन और डाटा की गुणवत्ता बेहतर करनी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले मामलों में 90 दिवस तथा अन्य सभी अपराधों में एफआईआर दर्ज होने के 60 दिवस के भीतर विवेचना पूर्ण कर चालान प्रस्तुत करना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए लंबित प्रकरणों की श्रेणीवार सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका समयबद्ध निराकरण किया जाए। सामान्य प्रकृति के अपराधों का अधिकतम आठ दिनों में निराकरण तथा जटिल मामलों में एसडीओपी के मार्गदर्शन से गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
आईजीपी ने कहा कि नवीन कानूनों के अनुरूप ई-साक्ष्य संकलन, ऑडियो-वीडियोग्राफी, सीसीटीएनएस में सभी आवश्यक प्रपत्रों की समय पर एंट्री, डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग तथा मेडिकल अनुरोध मेडलर (MedLEaPR) पोर्टल के माध्यम से भेजना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। साथ ही न्यायालयीन पेशियों में पुलिस कर्मियों की समय पर उपस्थिति बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया।
संपत्ति संबंधी अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए श्री गर्ग ने स्पष्ट कहा कि एफआईआर दर्ज करने में किसी प्रकार की टालमटोल नहीं होनी चाहिए। थाना प्रभारी स्वयं थाने में उपस्थित होने पर प्रत्येक वैधानिक शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करें। चोरी के वाहनों की बरामदगी के लिए ‘सशक्त ऐप’ का अधिकतम उपयोग करने, आदतन अपराधियों एवं गुंडा-बदमाशों की सतत निगरानी रखने तथा जमानत पर छूटे अपराधियों द्वारा दोबारा अपराध करने पर उनकी जमानत निरस्त कराने के लिए न्यायालय में आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि फरार आरोपियों के विरुद्ध चालान पेश होने के बाद वारंट जारी कराने की प्रक्रिया में विलंब न हो तथा शून्य मर्ग दर्ज होने पर संबंधित थाना क्षेत्र को तत्काल सूचना दी जाए ताकि महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रह सकें। एनडीपीएस प्रकरणों की विवेचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए समय-समय पर अधिकारियों एवं विवेचकों का प्रशिक्षण आयोजित करने के भी निर्देश दिए।
बैठक के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने पुलिस महानिरीक्षक को आश्वस्त किया कि रायगढ़ पुलिस उनके सभी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ पालन करेगी। उन्होंने कहा कि जिले में अपराध नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, नवीन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीक आधारित पुलिसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदारी के साथ कार्य करेगा।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, डीएसपी श्रीमती उन्नति ठाकुर, डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह, डीएसपी सुशांतो बनर्जी, डीएसपी सतीश भार्गव, रक्षित निरीक्षक अमित सिंह सहित जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी उपस्थित रहे।
