आखिर, कांग्रेस भाजपा समेत सभी पार्टियों के दिग्गज नेताओं को क्यों डरा रहा है,केरल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी “सीपीएम” का टिकट वितरण फार्मूला..?केरल चुनाव में अगर हिट हुआ फार्मूला, तो कई पार्टियां इसे अपना कर पुराने नेताओं की कर सकती है छुट्टी

by Kakajee News

(शशि कोन्हेर द्वारा)

नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु और पुडुचेरी के साथ विधानसभा चुनाव का सामना करने जा रहे केरल में इस वक्त माकपा की अगुवाई वाली लेफ्ट फ्रंट सरकार सत्तासीन है। यहां के मुख्यमंत्री और माकपा के नेता श्री पिनाराई विजयन ने इस बार अपनी पार्टी के टिकट वितरण के लिए एक अद्भुत फार्मूला इजाद किया। इसके मुताबिक पार्टी ने इस चुनाव में केरल में उन सभी दिग्गज नेताओं को विधानसभा चुनाव की टिकट नहीं दी जो लगातार दो या, दो से अधिक बार से विधायक हैं। इस फार्मूले के तहत मुख्यमंत्री विजयन ने अपनी पार्टी के ऐसे 33 दिग्गज नेताओं की टिकट काट दिए हैं जो लगातार दो अथवा दो से अधिक बार से चुनाव जीतकर विधायक बने हुए हैं। इनमें कई प्रदेश के मंत्री भी शामिल हैं जिनके भी टिकट काट दिए गए हैं।ममतलब यह कि इस नए फार्मूले के तहत प्रदेश के सभी बड़े और दिग्गज सीपीएम नेताओं के टिकट काट दिए गए। इससे वहां बड़ी हाय तौबा मची हुई है। लेकिन मुख्यमंत्री और सीपीएम नेता पिनाराई विजयन का कहना है कि पार्टी ने नए और खासकर युवाओं को मौका देने के लिए यह फार्मूला अख्तियार किया है। इससे पार्टी के प्रति समर्पित युवाओं को मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से पार्टी के कई दिग्गज नेता खार खाए हुए हैं। केरल के राजनीतिक पर्यवेक्षक भी सीपीएम के इस टिकट वितरण फार्मूले को जोखिम भरा मान रहे हैं। लेकिन जैसे कि आसार दिखाई दे रहे हैं, अगर सीपीएम का यह फार्मूला हिट व कारगर हुआ। और सीपीएम की अगुवाई में लेफ्ट फ्रंट फिर से केरल में सरकार बनाने में कामयाब हो जाता है। तो इस टिकट वितरण फार्मूले का देश की भाजपा और कांग्रेस समेत विभिन्न प्रमुख प्रादेशिक पार्टियों पर खासा असर पड़ सकता है। और यह पार्टियां भी इसी फार्मूले के तहत,प्रदेशों में चुनावी सफलता के लिए पुराने खडूस और दिग्गज नेताओं के टिकट काटकर नए लोगों, खासकर युवाओं को मौका देने का मन बना सकती हैं। ऐसा हुआ तो देश के सभी प्रमुख राज्यों में बीते कई सालों से राजनीति की अग्रिम पंक्ति में अंगद से पांव जमाए बैठे, कई खडूस नेताओं के पैर उखड़ते से नजर आ सकते हैं। जहां तक भाजपा की बात है, उसकी नजर भी केरल में सीपीएम द्वारा अपनाए गए इस फार्मूले पर टिकी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैसे भी पार्टी में युवाओं को आगे लाने की दिशा में हमेशा सक्रिय रहते हैं। अगर केरल के सीपीएम का यह टिकट वितरण फार्मूला (हिट होने के बाद) कांग्रेस और भाजपा हाईकमान को भी पसंद आ जाता है तो देश की राजनीति का चेहरा ही बदल सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान वैसे भी नए लोगों को अवसर देने की ठोस पहल की गई थी। इसके तहत छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने लोकसभा के सभी पुराने चेहरों की टिकट काटकर नए लोगों को लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया था। और यह फार्मूला सफल भी रहा। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को आशंका है कि अगर केरल का टिकट वितरण फार्मूला भाजपा और कांग्रेस पार्टियों के द्वारा छत्तीसगढ़ में भी लागू किया गया तो यहां भी दोनों प्रमुख पार्टियों के अनेक दिग्गज नेताओं के चुनावी भविष्य पर विराम लग सकता है। इसलिए सभी पार्टियों के नेता यह चाहते हैं कि केरल में सीपीएम का टिकट वितरण फार्मूला फेल साबित हो जाए। देखना यह है कि 2 मई को होने वाली मतों की गणना में इस फार्मूले का क्या हश्र होता है..? क्योंकि उस पर ही इस फार्मूले के अन्य प्रदेशों और पार्टियों में लागू होने की संभावनाएं टिकी हुई हैं।

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