घरघोड़ा। जिले का घरघोड़ा नगर पंचायत ऐसा है, जहाँ आए दिन कोई न कोई विवाद सामने आते रहता है। विगत दो सालों से चल रहे विवादास्पद स्थितियों के कारण राज्य शासन ने यहां के सीएमओ प्रणव प्रधान का तबादला कर दिया और नए सीएमओ विक्रम भगत ने हाल ही में यहाँ जॉइनिंग भी कर लिया है। बावजूद इसके पहले से चला आ रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। ताजा मामला यह है कि क्षेत्रीय विधायक और मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त अध्यक्ष लालजीत सिंह राठिया द्वारा किए गए भूमि पूजन शिलालेख को हटाकर कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया, जिससे एक बार फिर घरघोड़ा नगर पंचायत में बखेड़ा खड़ा हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ विधायक तथा पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष आशा शिव शर्मा द्वारा विगत कार्यकाल में अधोसंरचना मद अंतर्गत विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन व लोकार्पण किया गया था, जिसका शिलालेख नगर पंचायत भवन के मुख्य द्वार पर स्थापित था। उक्त शिलालेख को विगत दिनों नगर पंचायत में तोड़कर हटा दिया गया। हद तो तब हो गई जब उक्त शिलालेख को कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया। जब इस वाकये की भनक कांग्रेसी पार्षदों और स्थानीय नेताओं को लगी तब वे सीएमओ पर भड़क उठे। लेकिन नवपदस्थ सीएमओ ने उनकी एक न सुनी और उन्हें उल्टे पाँव लौटा दिया, जिससे खफ़ा कांग्रेसी पार्षदों में प्रमुख रूप से सुरेंद्र चौधरी,शिवनाथ सिंह राठिया,नान्ही दुलारो पैंकरा,भगवती राजन श्रीवास,कनक पैंकरा,सुशील खांडे सभी में उबाल आ गया, फिर इसकी शिकायत लेकर एसडीएम और थानेदार के पास पहुँच गए, मगर अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
घरघोड़ा नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष तथा वार्ड क्रमांक 11 के कांग्रेसी पार्षद सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि जब से यहां भाजपाई अध्यक्ष की ताजपोशी हुई है, वे यहां कांग्रेसियों को कमजोर करने में लगे हैं और लगातार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं व पार्षदों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने अध्यक्ष और सीएमओ पर आरोप लगाते हुए कहा कि “जानबूझकर सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया है। वे चाहते हैं कि क्षेत्रीय विधायक और उनके कार्यकर्ताओं का अपमान हो जिससे कांग्रेसियों का मनोबल टूटे, परंतु हम उन्हें उनके नापाक मंसूबे में कामयाब नहीं होने देंगे और अन्याय के ख़िलाफ़ अंत तक संघर्ष करते रहेंगे।” श्री चौधरी ने बताया कि “हम विधायक महोदय का अपमान नहीं सहेंगे। यदि इस घोर निंदनीय करतूत के लिए अध्यक्ष और सीएमओ पर अपराध दर्ज नहीं हुआ तो इस लॉकडाउन के बाद स्थानीय प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरने से भी परहेज नहीं करेंगे।”
बहरहाल इस घटना को लेकर कांग्रेसियों में भयंकर उबाल देखा जा रहा है, लेकिन कोविड-19 के इस गम्भीर दौर में प्रशासनिक हठधर्मिता इतनी चरम पर है कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की बात सुनने तक की फुर्सत स्थानीय अधिकारियों को नहीं है। आगे यह देखना लाजिमी होगा कि इस मामले पर कोई कार्यवाही होती है या कांग्रेसियों का यह उबाल समय के साथ यूँ ही ठंडा पड़ जाता है ?
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