कोविड-19 महामारी का दूसरी लहर ने लगभग पूरे देश को अपने चपेट में ले लिया है, विशेषकर हमारा छत्तीसगढ़ पिछली बार से अधिक गंभीर परिस्थितियों के बीच खड़ा है। तेजी से बढ़ते संक्रमण तथा पिछले एक वर्ष के अनुभव को ध्यान में रखें तो यह बात समझ आती है कि लॉक डाउन समस्या का हल नहीं अपितु स्थिति को नियंत्रित करने लिया गया एक कालखंड मात्र है, तथा संक्रमण से बचाव का एकमात्र युक्ति मास्क, सेनेटाइजर का प्रयोग, सामाजिक दूरी तथा कोरोना मर्यादित आचरण ही है। एक संगठित समाज के रूप में आवश्यक है कि हम बचाव के इन युक्तियों का प्रयोग अपने व्यवहार में लाएं तथा कोरोना महामारी को गभीरता से लें अन्यथा दूसरी लहर के रूप में हमने भलीभांति देखा है कि संक्रमण को बढ़ते देर नहीं लगती।
इस दूसरी लहर में अपेक्षाकृत अधिक लोगों को अपनी जान गँवानी पड रही है जो अत्यंत दुःखद है, व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मेरा मानना है कि समय पर जांच न करवाना इसका एक बड़ा कारण है तथा यह संक्रमण को जानलेवा स्तर तक भी ले जा रहा है, विशेषज्ञों का कहना है कि “अगर हम कोरोना लक्षण आने के पहले ही दिन कोरोना जाँच करा लेते हैं तथा सही दवाई लेना शुरू कर देते हैं तो हम बहुत जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं तथा बिना स्थिति को गंभीर किये बहुत जल्द अपने सामान्य जीवन में लौट सकते हैं, वही दूसरी ओर जाँच तथा सही दवाई लेने में की गई एक एक दिन की देरी जाने अनजाने में कोरोना के संक्रमण को गंभीर बनाती चली जाती है तथा जब तक हम डॉक्टरी सलाह लेने पहुंचते हैं अत्यंत देर ही चुकी होती है।”
अतः मेरा सभी से निवेदन है जिस दिन हममें कोरोना के लक्षण दिखाई दें उसी दिन हमें नजदीकी शासकीय केंद्र पर जाकर बेझिझक अपना कोरोना जांच करवाना चाहिए यह न केवल हमें सुरक्षित करेगा अपितु हमारे परिवार तथा अन्य लोगों को भी सुरक्षित रखने में सहायक होगा।
बहुत ही कम अंतराल में विश्व भर में अब तक हुए शोध में यह बात स्पष्ट सामने आ रही है कि कोरोना महामारी में टीकाकरण संक्रमण की दर तथा संक्रमण की गंभीरता को रोकने या कम करने का एकमात्र प्रभावी तरीका है, तथा हमें इस बात का गर्व भी करना चाहिए कि भारत दुनिया में सबसे अधिक वैक्सीन बनाने वाला देश है, वहीं भारत में बने वैक्सीन की सफलता दर बहुत उच्च है, ऐसे में स्वदेशी वैक्सीन के ऊपर संदेह करने का कोई कारण नहीं बचता। भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता तथा भारत सरकार की कुशल तैयारी का ही परिणाम है कि जो वैक्सीन हमें मुफ्त में उपलब्ध है पड़ोसी देशों में उससे कम क्षमता वाली वैक्सीन के लिए भी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है तथा उसके बाद भी उन्हें वैक्सीन के लिए अन्य देशों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
तथा जिस सुगमता तथा चरणबद्ध तरीके से टीकाकरण की प्रक्रिया केंद्र शासन द्वारा शुरू की गई थी यह हमारी नकारात्मक सोच का परिणाम ही था कि टीकाकरण की धीमी रफ्तार ने आज स्थिति को गंभीर बना दिया।
आज जब संक्रमण तेजी से फैला तो हम टीकाकरण की ओर जा रहे हैं, एक समाज के रूप में हमारा यह व्यवहार भी आत्मचिंतन का विषय होना चाहिए।
इस लेख के माध्यम से मेरा व्यक्तिगत विचार यही है कि कोरोना संक्रमण में शासन के निर्देशों का पालन करें, स्थिति सामान्य होने पर सख्ती से कोरोना मर्यादित आचरण रखें तथा अपनी बारी आने पर अविलंब टीकाकरण अवश्य कराएं तथा दवाई भी और कड़ाई भी के पथ पर बने रहें।
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