नही रूक रही है शराब की तस्करी

by Kakajee News

रायगढ़. लॉकडाउन के समय जहां रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए प्रशासन ने समय तय कर दिया है वहीं देशी व विदेशी शराब दुकानों मंे भी ताले लटके हुए हैं और इनकी ऑनलाईन बिक्री भी बंद हो गई है। जानकार सूत्र बताते हैं कि अधिकांश शराब तस्कर कुछ आबकारी उप निरीक्षकों के साथ मिलकर बड़े आराम से शराब की तस्करी करके रोजाना लाखों रूपए की कमाई कर रहे हैं और इनकी धर पकड़ इसलिए नही हो रही है चूंकि इनके मुखबिर पुलिस तथा आबकारी विभाग में सक्रिय है। यहां यह बताना लाजमी है कि आबकारी विभाग में कुछ आबकारी निरीक्षक शराब तस्करों के साथ मिलकर दोगुनी कमाई करने में शामिल है और बकायदा देशी व विदेशी शराब दुकानों के स्टाक को धीरे-धीरे निकालकर बिकवाने में लगे हैं। चारगुना रेट में शराब लेने वाले ग्राहक इनसे संपर्क करते हैं और कुछ ही घंटों में ग्राहक के घर में उनके मन माफिक शराब पहुंच जाती है।
इस पूरे मामले में हमने जिले के सहायक आबकारी आयुक्त मंजूश्री कसेर से चर्चा करनी चाही तो उन्होंने हमेशा की तरह अपना मोबाईल फोन बंद कर रखा था। चूंकि कार्यालय लॉकडाउन के चलते बंद है। इसलिए उनसे कोई बातचीत नही हो पाई।
शराब दुकानों को स्टाक वेरिफिकेशन है जरूरी
लॉकडाउन लगने के बाद से छत्तीसगढ़ के सभी शराब दुकानों मंे ताले लगे हुए हैं लेकिन जब लॉकडाउन खुलता है तब उनका स्टाक का वेरिफिकेशन नही होनें से आबकारी विभाग के अधिकारी चैन की सांस लेते हैं चूंकि शराब तस्करों को दुकानों में रखी शराब आसानी से मिल जाती है और उसी दुकान की शराब को तस्कर तीन से चार गुना दामों में बेच देते हैं और इसमंे आबकारी विभाग के कुछ उप निरीक्षक शामिल रहते हैं और उन्हें इस बात का फायदा मिलता है कि दुकानों में रखा स्टाक बंद होनंे से पहले कितना था और लॉकडाउन के बाद दुकान खुलने पर कितना स्टाक बचा है इसकी जांच नही होती। अगर दुकानों में रखी शराबों का लॉकडाउन के बाद वेरिफिकेशन हो जाए तो एक बड़ा घोटाला सामने आएगा। ऐसा ही जिले में चल रही बार का भी है जहां कि शराब बड़े घरों में परोसी जा रही है।

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