बेमौत मर रहे जंगली हाथी, बढ़ते अवैध शिकार पर सरकार मौन, फिर एक जंगली हाथी की हुई मौत, अब तक 49 हाथी मरे

by Kakajee News

नरेश शर्मा रायगढ़

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बढ़ते हाथी की संख्या को लेकर राज्य सरकार द्वारा कोई ठोस योजना नही बनाने से लगातार हाथी प्रभावित इलाकों में हाथियों तथा ग्रामीणों के बीच संघर्ष की स्थिति बढ़ते जा रही है। बीते तीन सालों में रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ सहित छत्तीसगढ़ के अलग अलग जिलों में जंगली हाथियों की मौत हो चुकी है। जिनमें सर्वाधिक आंकड़े धरमजयगढ़ के हैं जहां हर दो माह के भीतर एक या दो जंगली हाथी खेतों के किनारे बिछाए गए करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से बेमौत मर रहे हैं। बावजूद इसके जिले के वनमंडलाधिकारी और राज्य सरकार केवल कागजों में ही योजना बनाकर बढ़ती मौतों का आंकड़ा रिकार्ड में चढ़ा रहे हैं।


आज फिर सुबह रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में एक जंगली हाथी की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई और बीते एक महीने के भीतर इस वनमंडल में जंगली हाथी की यह तीसरी मौत है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ वन मंडल रेंज के ग्राम पोटिया स्थित एक खेत में जंगली हाथी का शव मिला है। प्रारंभिक जांच में उसकी मौत करंट से होना बताया जा रहा है। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है।


लगातार बढ़ रहा हाथियों का इंसानों से संघर्ष

धरमजयगढ़ क्षेत्र में क्षेत्र में हाथियों और ग्रामीणों के बीच पिछले कई सालों से संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में कभी हाथी तो कभी इंसान की जान जा रही है। इस छेत्र के ग्रामीण अपनी फसल को हाथी से बचाने खेत के किनारे करंट प्रवाहित तार लगाते हैं जिससे छोटे मोटे जंगली जानवरों के अलावा हाथी इसके संपर्क में आते हैं और उनकी मौत हो जाती है। हालांकि हाथी की मौत के बाद वन विभाग की टीम संबंधित किसान पर कार्रवाई करके अपनी खानापूर्ति करती है लेकिन खेतों के किनारे अवैध करंट बिछाकर जंगली जानवरों की बढ़ती मौतों के मामलों में न तो वन विभाग गंभीर है और न ही राज्य सरकार। होना यह चाहिए कि ग्रामीणों को सीधे करंट प्रवाहित तार खेतों के किनारे बिछाने की अनुमति जब मिलती ही नही है तो अवैध विद्युत कनेक्शन लेने वाले किसानों पर कार्रवाई क्यों नही होती है।

छत्तीसगढ़ में पिछले तीन सालों में हाथियों के हमले से 204 लोगों की मौत, 49 हाथी भी मरे
छत्तीसगढ़ रायगढ़, धरमजयगढ़, कोरबा, जशपुर, सरगुजा सहित अन्य जिलों में पिछले तीन सालों में हाथियों के हमले में कुल 204 लोग मारे गए और इस दौरान 49 हाथियों की मौत हो गई। सरकार ने सोमवार को एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। विधानसभा में भी सरकार से विधायक धर्मजीत सिंह ने यह लिखित सवाल पूछा था जिसके जवाब में वन मंत्री मोहम्मद सिंह ने कहा कि 2018,2019 और 2020 में हाथियों के हमले में 207 लोग मारे गए और 100 लोग घायल हुए हैं। ये आंकड़ा सरकारी रिकार्ड में दर्ज है और निजी आंकड़ो पर गौर करें तो यह संख्या और बढ़ सकती है। बावजूद इसके राज्य सरकार जंगली हाथियों के कारीडोर बनाने के लिए कोई बड़ी पहल नही कर रही है वहीं दूसरी ओर कुछ जिलों में बढ़ते उद्योगों के चलते कटते जंगल भी हाथियों के उत्पात का एक बडा कारण है।

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