इंसानों के बीच पल रहे भालू के बच्चों को देखने यहां रोज उमड़ रही भीड़

by Kakajee News

बिलासपुर। अंबिकापुर जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र के खरसुरा और खोंदला गांव में इन दिनों भालू के दो बच्चों को देखने दूरदूर से लोग पहुंच रहे हैं। गांव में मेले जैसा माहौल है। वहीं सुरक्षा को लेकर भी अब सवाल खडा हो गया है। उदयपुर वन परिक्षेत्र के खरसुरा और खोंदला गांव में एक मादा भालू ने दो बच्चों को जन्म दिया और सुरक्षित रखने की मंशा से मादा बस्ती के करीब एक गड्ढे में छोड़ दिया। 16- 17 दिसंबर को इन बच्चों को ग्रामीणों ने देखा था।
पहले तो उन्हें लगा कि शायद एक-दो दिन में बच्चों को मादा भालू अपने साथ ले जाए लेकिन बच्चे छोटे और चलने फिरने में असमर्थ होने के कारण मादा भालू उन्हें नहीं ले जा पाई। इसके बाद से ग्रामीण वहां रोज आने जाने लगे। लोगों की भीड़ जुटती देख इलाके की रेंजर सपना मुखर्जी, पशु चिकित्सक डा. सीके मिश्रा, वन्य प्राणी जानकार प्रभात दुबे सहित वन कर्मी वहां पहुंचे। बच्चों की स्वास्थ्य जांच भी हुई और भीड़ को देखते हुए 20 मीटर इलाके में बैरिकेडिंग करने के अलावा बच्चों को ठंड से बचाने के लिए ऊपर से झालानुमा एक संरचना तैयार कर दिया गया।
नीचे पुआल भी डाल दिया गया। उदयपुर पुलिस को भी इस मामले में सहयोग मांगा गया ताकि वहां ग्रामीणों की भीड; को नियंत्रित किया जा सके। इतना सब कुछ इंतजाम करने के बावजूद स्थिति वहां ऐसी है कि एक जनवरी के बाद दूर के गांव के लोग घूमने फिरने यही पहुंच रहे हैं। ग्रामीण यहां घंटों डटे रहते हैं। पिछले दिनों कोरिया जिले के सोनहत और बलरामपुर जिले के आरा में मादा भालू के हमले में छह लोगों की मौत की घटना आज भी सभी को याद है। गंभीर घटना को देखते हुए इलाके के लोगों को वन विभाग लगातार समझाइश दे रही है। मादा और नर भालू के रात में वहां विचरण करने की सूचना के बाद आसपास के लोगों को शाम होते ही घरों में रहने और जंगल की ओर नहीं जाने कहा गया है, लेकिन यह सब व्यर्थ साबित हो रहा है। खरसुरा और खोन्दला गांव के जिस इलाके में मादा भालू के दो बच्चे पिछले 20 दिनों से गड्ढे में पड;े हुए हैं वहां रोज काफी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
भालुओं में नर-मादा साथ पालते हैं बच्चों को
वन्य प्राणी जानकार प्रभात दुबे के अनुसार बच्चों को पालने में जंगली जानवरों का तरीका अलग-अलग होता है। शेर और बाघ में मादा बच्चों को एकांत में ले जाकर जन्म देती है और कई दिनों तक उसकी देखरेख करती है लेकिन जंगली भालुओं में मेटिंग के बाद से नर और मादा साथ-साथ ही रहते हैं। बच्चे के जन्म से उसकी सुरक्षा और उनका पालन दोनों मिल कर करते हैं। यही कारण है कि खरसुरा और खोन्दला गांव में नर और मादा भालू रात में बच्चों के पास पहुंचते हैं। इस दौरान मादा भालू अपने बच्चों को दूध भी पिलाती है। इसके बाद दोनों भोजन की तलाश में इलाके में विचरण करते हैं। दीमक की बांबी को खोदकर भोजन करते हैं। दोनों के पंजों के निशान भी आसपास के ग्रामीणों ने देखा है।

Related Posts

Leave a Comment