राज्यपाल के बदलाव के बाद एक बार फिर से कांग्रेस बीजेपी आमने सामने है | कांग्रेस का कहना है कि आरक्षण विधेयक पर भाजपा के दबाव के चलते हस्ताक्षर नहीं कर पाई । जिसका खामियाजा हुआ और उनका स्थानांतरण यहां से बदलकर मणिपुर हो गया | तो बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस सिर्फ जातिवाद पर बात कर सकती है | जिस कारण कांग्रेस गर्त में चली गई |
दरअसल 2023 विधानसभा चुनाव में आरक्षण के विषय के प्रभाव पर मोहन मरकाम ने कहा था कि भाजपा के दबाव पर आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं हुआ । राज्यपाल आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर करना चाहती थी। भाजपा के दबाव पर वह हस्ताक्षर नहीं कर पाई । जिसका खामियाजा आपने देखा होगा उनका स्थानांतरण यहां से बदलकर मणिपुर कर दिया गया है | जेपी नड्डा छत्तीसगढ़ आते है और राज्यपाल का तबादला हो जाता है। उसके पहले देखें तो आदिवासी दिवस के दिन आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को भी बदल दिया जाता है।
भाजपा का आदिवासियों के प्रति स्वभाव साफ तौर पर दिख रहा है। इसलिए 2018 में भाजपा को पटकनी दी थी।वही पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने राज्यपाल के बदलाव और मोहन मरकाम के बयान पर पर पलटवार करते हुए कहा कि मोहन मरकाम किसी तथाकथित पार्टी के अध्यक्ष है या किसी जाति समुदाय के।
विधानसभा में भी वह जातिवादी बात करते हैं | राजनीति में भी जातिवाद का विभाजन बात करते और अपने आपको पता था कि है राष्ट्रीय दल से जुड़े हुए हैं | नेता विभाजन कारी बात करते हैं और विभाजनकारी लोगों के नेतृत्व के कारण कांग्रेस गर्त में चली गई है ,जाएगी और यहां भी जाएगी |
