अजगर की आक्रामक मुद्रा का सामना कर जितेंद्र बन गया अजगर मैन

by Kakajee News

बिलासपुर। जहरीले सांपों को पकड़ने का शौक तो कई लोगों को होता है पर अंबिकापुर शहर के सरगवां में रहने वाले जितेंद्र मंडल का शौक बड़े अजगर सांपों को पकड़ने का है। जितेंद्र मंडल पांच माह के बीच एक दर्जन से अधिक अजगर सांपों को पकड़ जंगल में छोड़ चुका है। अजगर सांप शहर से लगे सरगवां, वाटर पार्क इलाके में ही अधिक हैं। इससे साफ हो गया है कि शहर के इस इलाके में अजगर ही अजगर हैं। इन अजगरों को पकड़ने के लिए यह युवक अब अजगर मैन की तरह चर्चित हो गया है।
साहसी युवक जितेंद्र अजगरों को पकड़ने के लिए पहले तो लकड़ी की कैंची बना उपयोग में लाता था, अब खुद से एक साधारण यंत्र का निर्माण किया है, जिसके सहारे बड़े अजगर सांप को पकड़ वह कल्याणपुर जंगल में छोड़ने निकल पड़ता है। कई लोग अजगर सांप को गले में डाले देख उससे दूरी बनाते हैं, पर जितेंद्र इसकी परवाह नहीं करता। बचपन में घर की पालतू मुर्गी को अजगर के जबड़े में देख उसे बचाने की कोशिश करते वह अपने गांव में अजगर मैन के नाम से जाना जाएगा, नहीं सोचा था। किशोर अवस्था में ही उसने मुर्गी को बचाने अजगर की आक्रामक मुद्रा का सामना किया। मुर्गी तो नहीं बची लेकिन वह अजगर को परास्त करके दम लिया। इसके बाद जहां भी कोई अजगर सांप उसे नजर आता, उसे काबू में कर जंगल छोड़ने चला जाता। पहले लोग सांप का गर्दन पकड़ उसे देखते तो तरह-तरह की टिप्पणी करते थे, बाद में सरगवां से लेकर गोधनपुर वाटर पार्क के इलाके तक उसका नाम कुछ ऐसा फैला कि घर, खेत में अजगर को देखने के बाद उसकी मदद लेने लगे। कुछ लोगों ने प्रोत्साहन स्वरूप उसे कुछ रुपये भी दिए, लेकिन रुपये के प्रलोभन से दूर अजगर सांप के सार्वजनिक स्थल, खेत, घर में निकलने की खबर उसे रोमांचित कर देती है और वह उसे पकड़ने के लिए निकल पड़ता है। अजगर के अलावा वह फनिक सांप भी पकड़ चुका है। विषधर अहिराज को देख लोग उसे मारने की तैयारी कर रहे थे लेकिन जितेंद्र उसे काबू में कर जंगल छोड़ आया। सरगवां इलाके के अलावा आसपास के लोग घरों में सांप के निकलने पर उसे बुलाते हैं। वाटर पार्क के अधीक्षक की खबर पर वह अब तक वह चार अजगर सांप को कब्जे में लेकर जंगल में छोड़ चुका है। कुछ सांपों को वह वन विभाग के सुपुर्द किया, लेकिन जंगल तक इन्हें छोड़ने में उसे सहयोग करना पड़ा। इसके बाद वह स्वयं इन सांपों को कल्याणपुर जंगल में छोड़ने का बीड़ा उठा लिया।

सोमवार को फिर पकड़ा अजगर
वाटर पार्क के पास गौतम मंडल के बाड़ी में सोमवार को मोहल्ले के ही एक व्यक्ति की नजर पड़ी, जो लगभग 10 फिट लंबा था। अजगर सांप को देख उसने गौतम को इसकी सूचना दी। जब वह मौके पर पहुंचा तो किसी को आहार बना अजगर सांप पड़ा था। करीब जाने पर उसका रूख बदला और उसने इसकी सूचना जितेंद्र को मोबाइल पर दोपहर लगभग 12 बजे दी। आधे घंटे की मशक्कत के बाद वह उसे काबू में कर कल्याणपुर जंगल में छोड़ आया।

बाड़ी से अजगर पकड़ने की किया शुरुआत
किशोरावस्था में जितेंद्र ने देखा था कि उसके घर में पल रही मुर्गियां रोजाना गायब हो जाती हैं। मुर्गियों के गायब होने पर किसी के द्वारा मुर्गी चोरी करने या खाने की संभावना बनी रहती थी। वर्ष 2006 में जितेंद्र ने बाड़ी में खेलते समय मुर्गी के हलाल होते समय होने वाली आवाज सुनी, जिसे सुनकर वह केले के बाड़ी की ओर गया, जहां विशालकाय अजगर के सांप के जबड़े में घर में पली मुर्गी को वह देखा और उसे बचाने अजगर सांप की हर आक्रामक मुद्रा का सामना कर उसके गर्दन को कसकर पकड़ लिया। मुर्गी तो नहीं बची लेकिन उसके इस प्रयास से घर के सदस्यों की यह भ्रांति दूर हो गई कि मुर्गी कोई चोरी नहीं कर रहा बल्कि अजगर सांप का आहार बन रहा था। जितेंद्र बताता है कि वह अपने बाड़ी से अब तक चार अजगर सांप को पकड़ जंगल में छोड़ चुका है।

छोटे सांपों को पकड़ने में रुचि नहीं
किशोरावस्था में अजगरों को पकड़ने के साहस ने जितेंद्र को अलग पहचान दी है। सरगवां इलाके में लोग अब सांप देखते ही जितेंद्र को बुलाते हैं। छोटे-मोटे सांपों को पकड़ने में उसे कोई रुचि नहीं पर अजगर या जहरीले फनिक सांप का नाम सुनते ही वह दौड़ पड़ता है। जितेंद्र बताता है कि अपने घर की बाड़ी में चार अजगर सांप को पकड़ने के बाद वह पांच माह के अंतराल में हाउसिंग बोर्ड कालोनी में निर्माणाधीन देवरंजन राय के मकान से दो, गौतम की बाड़ी से दो, वाटर पार्क से चार अजगर सांप पकड़ चुका है। खबर मिलने की देर है वह अजगर सांप को पकड़ सुरक्षित जंगल में छोड़ने के लिए निकल पड़ता है।

आहार की तलाश में पहुंचते हैं पार्क, बाड़ी तक
जितेंद्र उर्फ जीतू मंडल का मानना है कि सरगवा इलाके में अजगर सांप काफी संख्या में है। जंगल झाड़ी के बीच अजगर सांप का डेरा है, जो आहार की तलाश में खेतों तक पहुंच जाते हैं। इनके द्वारा अभी तक किसी इंसान को तो क्षति नहीं पहुंचाई गई है, लेकिन मुर्गा-मुर्गी, बकरी के बच्चों को यह अपना आहार बना चुके हैं। सांपों को सुरक्षित रखने के लिए स्नेक पार्क की जरूरत लोग महसूस कर रहे हैं। पास ही वाटर पार्क होने के कारण यहां अजगर सांप के विचरण का खतरा बना रहता है। वाटर पार्क के उद्यान निरीक्षक तिलेश्वर साहू ने स्वयं जितेंद्र की मदद से अजगर सांप को रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छुड़वाया है।

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