युवक निगल गया 14 सेमी लंबा चाकू, एम्स में चिकित्‍सकों ने सर्जरी कर निकाला

by Kakajee News

भोपाल । बाहरी चीजें निगलने की आदत ने एक युवक को मौत के मुंह में पहुंचा दिया। एम्स के डॉक्टरों ने सर्जरी कर उसे बचा लिया। छतरपुर के रहने वाले 38 साल के युवक ने 24 जनवरी को 14 सेमी लंबा और साढ़े 3 सेमी चौड़ा चाकू निगल लिया था। कुछ देर बाद ही युवक को कुछ भी निगलने में बहुत दर्द होने लगा। परिजन 26 जनवरी की सुबह उसे भोपाल स्थित एम्स लेकर आए। यहां युवक ने बताया कि उसने दो दिन पहले चाकू निगल लिया था। उसे बाहरी चीजें निगलने का शौक है। गंभीर स्थिति को देखते हुए युवक की आपातकालीन सर्जरी की योजना बनाई गई।
इसके लिए पहले आहार नली की एंडोस्कोपी की गई। इसमें चाकू का पिछला हिस्सा और एक रिफिल दिखाई दी। रिफिल को एंडोस्कोप से निकाला गया। चाकू बड़ा था। इसे इंडोस्कोपी से निकालने पर आहार नली में जख्म हो सकते थे। लिहाजा, खुली प्रक्रिया से सर्जरी का निर्णय लिया गया। गर्दन के बायीं ओर से ऑपरेट कर आहार नली में चार सेमी का चीरा लगाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे चाकू को बाहर निकाला गया। अब रोगी की हालत में सुधार हो रहा है। सर्जरी करने वाली टीम में नाक, कान एवं गला विभाग के अपर प्राध्यापक डॉ. विकास गुप्ता की मौजूदगी में सहायक प्राध्यापक डॉ. गणकल्याण बेहरा, सीनियर रेसीडेंट डॉ. श्रेय, जूनियर रेसीडेंट डॉ. संदीपन, डॉ. प्रिंस, एनेस्थीसिया विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. रितिका आदि शामिल थे।

दो साल पहले भी पेट से निकाली गई थीं कई चीजें
रोगी के परिजन ने बताया कि दो साल साल से उसे बाहरी चीजें निगलने की आदत है। जब तकलीफ बढ़ती है तो परिजन को बताता है। 2019 में भी अन्य अस्पताल में उसके पेट से कई चीजें निकाली गई हैं। इसके बाद भी उसने कई चीजें खाई हैं जो उसके पेट में पड़ी हैं। हालांकि, इन चीजों से युवक को ज्यादा नुकसान नहीं है, इसलिए अभी उन्हें निकालने का निर्णय नहीं लिया गया है।

नशे का आदी है युवक
चिकित्सकों द्वारा पूछताछ में पता चला है कि युवक नशे का आदी है। पिछले 10 साल से शराब, बीड़ी, गुटखा और गांजा का सेवन करता है। दो सालों से वह अनियमित रूप से एंटीसायकोटिक दवाओं का सेवन कर रहा था।

इंप्लस कंट्रोल डिस्‍ऑर्डर (आइसीडी) और साइकोसिस दोनों बीमारियों में व्यक्ति इस तरह का व्यवहार करता है। आइसीडी में व्यक्ति को कई ऐसे काम करने की आदत हो जाती है, जो सामान्य व्यक्ति नहीं करता। ऐसा नहीं करने पर उसे बैचैनी होने लगती है। इस मरीज को इनमें से एक या दोनों बीमारियां हो सकती हैं।
-डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक

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