बीमा अवधि में वाहन चोरी, बीमा कंपनी ने नही किया भुगतान, अब फोरम के आदेश से देना होगा जुर्माना

by Kakajee News

रायगढ़। बीमा अवधि में बीमित वाहन चोरी होनें के बाद बीमा कंपनी एसबीआई जनरल एंश्योरेंस कंपनी बिलासपुर के द्वारा भुगतान में आनाकानी करने के मामले में उपभोक्ता न्यायालय ने आज बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी करार देते हुए क्ष़्ातिपूर्ति, वाद व्यय के रूप में लगभग 50 हजार रूपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है।
मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी मुकेश कुमार साहू निवासी वार्ड नं. 21 बंगलापारा बेलादुला ने अपने वाहन हीरा कंपनी क्रमांक सीजी 12 एबी 1612 का बीमा एसबीआई जनरल इंश्यारेंस कंपनी लिमिटेड बिलासपुर से प्रीमियम अदा कर किया था। बीमा अवधि 9 नवंबर 2023 से 8 नवंबर 2024 तक वैध था। मुकेश कुमार साहू के बीमित वाहन का 27 मई 2024 को उसके कार्य स्थल बजाज फायनेंस कंपनी ढिमरापुर रायगढ से चोरी हो गया जिसकी सूचना वाहन स्वामी के द्वारा कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई। तथा जिला परिवहन अधिकारी को भी इसकी सूचना दी गई। इस मामले में पुलिस द्वारा खोजबीन करने के बावजूद वाहन का कोई सुराग नही मिलने पर अंतिम प्रतिवेदन खात्मा रिपोर्ट 7 दिसंबर 2024 को जारी कर परिवादी मुकेश कुमार साहू को प्रदान किया गया।
चूंकि उक्त वाहन बीमा अवधि में चोरी हुआ था इसलिये मुकेश साहू ने इससे संबंधित दस्तावेज बीमा कंपनी को प्रस्तुत कर क्षतिपूर्ति की राशि में 50 हजार रूपये का भुगतान करने की मांग उठाई। किंतु बीमा कंपनी के द्वारा बीमित वाहन का भुगतान करने में आनाकानी करने और वाहन स्वामी को बार-बार दफ्तर के चक्कर लगवाने के बाद बीमा राशि का भुगतान नही मिलने पर पीड़ित वाहन स्वामी ने अधिवक्ता के माध्यम से बीमा कंपनी को नोटिस देने के बाद उपभोक्ता न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया और क्षतिपूर्ति राशि तथा अनुतोष की मांग उठाई।
इस मामले में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष श्रीमती रंजना दत्ता, व सदस्य द्वय श्रीमती राजश्री अग्रवाल व राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ने दोनों पक्षों की सुनवाई पश्चात इस मामले में बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी करार देते हुए वाहन स्वामी को आईडीबी वेल्यु के अनुसार 22 हजार 658 रूपये का भुगतान 45 दिवस के भीतर करने तथा मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 20 हजार रूपये वाद व्यय के रूप में 5 हजार रूपये का भुगतान करने का आदेश पारित किया है। नियत समय में राशि का भुगतान न करने पर नियत तिथि से भुगतान तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के रूप में भी भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इस मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता अमरेन्दु पण्डा के द्वारा पैरवी की गई।

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