बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक खुद नियमों के उल्लंघन कर जनगणना का उड़ा रहें मजाक! ये हैं धरमजयगढ़ BEO के होनहार शिक्षक….?

राष्ट्रीय दायित्व पर सवाल उठाने वाले शिक्षक, आखिर BEO क्या कर रहे हैं?अधिकारियों का सम्मान नहीं, ऐसे शिक्षकों से बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित?

by Kakajee News

 

 

जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्य पर शिक्षकों की आपत्तिजनक टिप्पणी
धरमजयगढ़ विकासखंड में जनगणना 2027 के कार्य के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। छाल क्षेत्र के चार्ज में जनगणना अधिकारी द्वारा जिला जनगणना अधिकारी को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ शिक्षकों ने जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों के निर्देशों और कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक व्हाट्सएप ग्रुप में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। बताया गया है कि यह ग्रुप जनगणना कार्य से जुड़े पर्यवेक्षकों एवं सुपरवाइजरों का था, जिसमें कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे।

ग्रुप में दिखा जनगणना पर सवाल उसके बाद तहसीलदार को हटाने की माँग?

सारे मामले को देखकर अब लोंग उल्टा उन शिक्षकों पर सवाल खडे करने लगे हैं और लोंग कह रहें हैं की पहले तों यह शिक्षक जनगणना पर टिप्पणी कर रहें की क्या मज़ाक हैं भाई भारत की जनगणना का मेरा तों समझ से परे हैं, उसके बाद अब उल्टा छाल तहसीलदार को जनगणना चार्ज अधिकारी के पद से हटाने के लिए कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंप रहें। मामला जो भी हो पर वे शिक्षक जिनको बच्चों के भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी दी जाती हैं वे ग्रुप में जनगणना कार्य पर सवाल खड़े कर रहें तों क्या उन्हें अपनी गलती का अहसास नहीं?

एक शिक्षक की टिप्पणी पर दूसरे शिक्षकों का समर्थन, अनुशासन पर सवाल

पत्र के अनुसार, प्रधान पाठक प्रदीप कुमार नायक द्वारा जनगणना कार्य को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ टिप्पणी की गई। आरोप है कि इसके बाद कुछ अन्य शिक्षकों ने भी उनका समर्थन किया। जनगणना अधिकारी ने इसे शासकीय सेवा आचरण नियमों, भारतीय न्याय संहिता और जनगणना अधिनियम का उल्लंघन बताया है। मामले में कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात कही गई है।

खंड शिक्षा अधिकारी की निगरानी पर सवाल, ऐसे शिक्षकों से बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित?

सबसे बड़ा सवाल अब खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। जिन शिक्षकों के कंधों पर बच्चों के भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी है, यदि वही सार्वजनिक मंचों पर वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति अनुशासनहीन भाषा का प्रयोग करें और राष्ट्रीय महत्व के कार्यों पर सवालिया टिप्पणियां करें, तो शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्षेत्र में चर्चा है कि यदि विद्यालयों में अनुशासन और नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक स्वयं प्रशासनिक मर्यादाओं का पालन नहीं कर रहे हैं, तो विद्यार्थियों को क्या संदेश जाएगा? ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या खंड शिक्षा अधिकारी अपने अधीनस्थ शिक्षकों पर प्रभावी नियंत्रण और निगरानी रखने में विफल साबित हो रहे हैं?

निष्कर्ष
जनगणना जैसे राष्ट्रहित के महत्वपूर्ण कार्य में बाधा उत्पन्न करने और प्रशासनिक अनुशासन को चुनौती देने वाले मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वे केवल नोटिस तक सीमित रहते हैं या वास्तव में जवाबदेही तय कर शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं।

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