यह किसी फिल्म की स्टोरी से कम नहीं है। शातिर दिमाग जीजा-साले की जोड़ी ने पांच साल में साठ लाख रुपए का घोटाले को अंजाम दे डाला। घोटाले की रकम दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी। दोनों बेखौफ अंदाज में पुलिस अफसरों की आंखों में धूल झोंक रहे थे। घोटाले का पर्दाफाश होने पर पुलिस जीजा-साले के बैंक एकाउंट खंगाल रही है। सूत्रों के मुताबिक दोनों के आधा दर्जन से अधिक बैंक एकाउंट मिले हैं, जिन में दोनों घोटाले की रकम ट्रांसफर करते थे। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने भी मामले की जांच तेज कर दी है। चरित्र पंजिका में अनिल के स्थान पर सुनील का फोटो कैसे चस्पा किया गया। किन-किन पुलिस कर्मियों का इस कार्य में हाथ है। माना जा रहा है कि जल्द ही घोटाले में शामिल अन्य वर्दीधारियों पर भी गाज गिरेगी।
मुजफ्फर नगर निवासी अनिल कुमार 2011 में पुलिस में भर्ती हुआ। 2016 तक उसने नियमित रूप से नौकरी की। बरेली से मुरादाबाद ट्रांसफर होने पर उसने अपने साले सुनील कुमार को अपने स्थान पर ज्वाइनिंग करा दिया। खुद शिक्षा विभाग में शिक्षक बन गया। अनिल कुमार पुलिस विभाग द्वारा हासिल की जा रही सेलरी में से आठ हजार रुपए साले सुनील को देता था। बेरोजगार सुनील आठ हजार लेकर बिना किसी ट्रेनिंग और एंट्रेंस के पुलिस की वर्दी पहनकर कानून का रखवाला बना हुआ था। सूत्रों के मुताबिक अनिल शिक्षा विभाग से हर माह सेलरी हासिल कर रहा था। एक अनुमान के अनुसार 2011 बैच के सिपाही की सेलरी पचास हजार रही होगी। दूसरी तरफ 2016 में ज्वाइनिंग करने वाले शिक्षक की सेलरी भी पचास हजार ही होगी। दोनों सेलरी मिलाकर एक लाख रुपए प्रति माह जीजा साले की जोड़ी सरकार को चूना लगा रही थी। यही धनराशि पांच साल में साठ लाख बैठती है। मसलन शातिर जीजा और साले की जोड़ी ने किसी फिल्म की तर्ज पर पांच साल में साठ लाख रुपए का घोटाला कर डाला।
कई जिलों में भेजी गई टीम :
पुलिस की एक टीम सीतापुर भेजी गई है। दूसरी टीम को मुजफ्फर नगर भी भेजा गया है। दोनों टीमों में शामिल पुलिस कर्मी शातिर जीजा और साले के बैंक एकाउंट खंगाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों जीजा-साले के आधा दर्जन से अधिक बैंक एकाउंट अलग-अलग बैंकों में पुलिस को मिले हैं। किस खाते में कितना-कितना ट्रांजेक्शन किस-किस एकाउंट में होता था। इसकी पूरी जानकारी पुलिस टीम हासिल करने में जुटी हुई हैं। सीओ ठाकुरद्वारा डाक्टर अनूप यादव ने बताया कि पुलिस टीम सीतापुर भेजी गई हैं। वहीं दूसरी ओर पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इतना तो तय है कि बिना विभागीय मदद के इतना बड़ा खेल नहीं खेला जा सकता है।
