न्याय पाने दर-दर भटक रहा दलित परिवार, हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी नगर निगम मौन, कब मिलेगा माधोराम को न्याय

by Kakajee News

रायगढ़. केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों ने दलितों के लिए कई कानून बनाए हैं और इस कानूनों में यह बताया जाता है कि इनके उपर किसी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नही किया जाएगा और न ही इनकी सुनवाई में कोई कोताही बरती जाएगी। लेकिन रायगढ़ जिला मुख्यालय में एक दलित परिवार ऐसा है जो बीते 13 सालों से नगर निगम द्वारा जबरन उनकी जमीन पर सड़क बनाकर हथिया जाने के बाद भी न तो जमीन के बदले जमीन और न ही उस जमीन के बदले मुआवजा दिया जा रहा है। इतना ही नही पीड़ित दलित परिवार ने अपनी रोजी रोटी की पूरी पूंजी हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगाते हुए खर्च कर दी और वहां से भी हाईकोर्ट ने इस परिवार के पक्ष में फैसला दिया है लेकिन निगम ने हाईकोर्ट के आदेश को भी अपनी मोटी फाईलों में दबा दिया है आज यह परिवार भूखे मरने की नौबत में पहुंच गया है और मुआवजे की आस में परिवार के लोग भी धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं।
रायगढ़ शहर के माधोराम सतनामी का भरा पूरा परिवार है कभी यह परिवार खुशहाल भी था। आखिर शहर के अंदर सड़क किनारे उनकी जमीन जो थी। लेकिन हुक्मरानों को उस पर बुरी नजर पड़ गई और इनका पूरा परिवार सड़क पर आ गया। दरअसल नगर निगम मौदहापारा से सारंगढ़ बस स्टैंड के लिए रोड बनाया लेकिन माधोराम के सहमति के बगैर उसकी 2 एकड़ से ज्यादा जमीन सड़क में मिला ली। जब उसने मुआवजा मांगा तो निगम ने टरका दिया।
इसके बाद माधोराम ने हाई कोर्ट की शरण ली और वहां से यह आदेश आया कि जमीन की नापी कर माधोराम को नगर निगम मुआवजा दे दे। इस आदेश को आये पांच साल से ज्यादा हो गए लेकिन माधोराम के परिवार को न मुआवजा मिला न ही कोई आश्वासन।
रायगढ़ शहर के मिट्ठुमुड़ा निवासी माधोराम सतनामी और उसका परिवार शू पोलिश करके अपना घर चलाते हैं। बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपनी बात हाई कोर्ट में रखी थी जबकि वहां से आदेश हो गया फिर भी नगर निगम गूंगा बहरा बना हुआ है और पीड़ित परिवार सड़क पर आ गया है।

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