छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक मरीज को चारपाई पर लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। सरकार भले ही अंदरूनी इलाकों में विकास के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। गुरुवार को कोयलीबेड़ा ब्लॉक के पोरियाहुर गांव में सड़क, पुल और पुलिया के अभाव में जब एंबुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकी, तो बीमार ग्रामीण को 8 किलोमीटर तक ग्रामीण चारपाई पर लिटाकर पैदल चले।
मरीज के परिजनों ने बताया कि विष्णु गावड़े को गुरुवार तड़के 3 बजे के बाद अचानक उल्टी-दस्त और पेट दर्द शुरू हुआ, लेकिन रात अधिक होने के कारण डॉक्टर तक नहीं ले जा सके। सुबह होते-होते मरीज की हालत और बिगड़ती चली गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया।
बुलेस सुबह 8.30 बजे तक बारकोट नदी तक पहुंच गई, लेकिन इससे आगे एंबुलेंस का आना मुश्किल था। समय पर मरीज को लेकर नहीं पहुंचने से एंबुलेंस वापस लौट गई। इसके बाद चारपाई पर लादकर विष्णु गावड़े को 8 किलोमीटर तक लेकर लोग पैदल चले। जब ग्रामीण मरीज को लेकर बारकोट घाट तक पहुंचे, तो देखा कि एंबुलेंस जा चुकी है। इसके बाद लोगों ने फिर से डायल 108 को कॉल किया।
इसके बाद ग्रामीणों ने थके हारे खाट पर लादकर ही 2 किलोमीटर संगम तक पहुंचे, जहां फिर से एंबुलेंस को बुलाया गया और पखांजूर अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों ने कहा कि एंबुलेंस समय पर नहीं आने के कारण उन्हें 8 किमी मरीज को चारपाई पर लादकर लाना पड़ा है। लोगों ने कहा कि संगम में अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुल जाए, तो ग्रामीणों को लाभ मिलेगा।
