अब जंगली हाथियों से सुरक्षा के ल‍िए मोबाइल तकनीक का सहारा

by Kakajee News

मोबाइल की तकनीक से जनता को जंगली हाथियों से सुरक्षा मिल सकती है। यह प्रदेश में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे गांवों और सीधी जिले में संभव हुआ है। गांव-गांव में पांच-पांच युवाओं का समूह बनाकर उन्हें वाट्सएप से जोड़ा जा रहा है। इस ग्रुप के माध्यम से हाथियों के आने-जाने की सूचनाएं साझा की जा रही हैं। ग्रुप का इस्तेमाल इस तरीके से किया जा रहा है कि उसके संदेश लोगों के लिए सुरक्षात्मक हथियार बन जाएं। यह प्रयोग विधिवत रूप से सोमवार से यहां शुरू हो जाएगा।
झारखंड और छत्तीसगढ़ के जंगली हाथियों का मध्य प्रदेश के सीधी जिले और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में विचरण होता रहता है। हाथियों के झुंड अक्सर कच्चे मकान तोड़ देते हैं और लोगों को कुचल देते हैं। पिछले महीने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पनपथा रेंज में हाथियों ने एक महिला को कुचल दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
वहीं, सीधी जिले के ग्राम खैरी में जंगली हाथियों के झुंड ने हमला किया जिससे काफी नुकसान हुआ। इस तरह की लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ग्राम स्तर पर रिस्पांस टीम बनाने और गांववालों को लगातार सूचनाएं देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ही एलीफेंंट कारीडोर नेटवर्क का विचार सामने आया।

यह किया जा रहा है
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों की मदद से हाथियों के विचरण मार्ग में पड़ने वाले गांवों के लोगों का एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। हर गांव के पांच-पांच युवाओं को जोड़ा जा रहा है। ये पांच युवा आवश्यक मदद भी समय पर बुला सकेंगे। इन युवाओं को एक वाटसएप गु्रप से जोड़ा गया है जिसमें हाथियों के झुंड की हर घंटे की जानकारी अपडेट की जाएगी। इससे गांववासी खतरे से सावधान रहेंगे और संकट की स्थिति में पहले से तय उपायों का उपयोग कर सकेंगे। हाथियों के गांव की तरफ आने की सूचना मिलने के बाद उन्हें खदेड़ने के लिए मिर्ची पाउडर का उपयोग, पटाखे फोड़ना और आग लगाने जैसे उपाय ग्रामीण कर सकते हैं।

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