11 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कोयले का उत्पादन , तलईपल्ली परियोजना द्वारा 59 करोड़ रुपये से अधिक का किया जा चुका विकास कार्य- अखिलेश सिंह

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घरघोड़ा । एनएमएल तलईपल्ली कोयला खनन परियोजना द्वारा प्रेस मीट का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता अखिलेश सिंह, परियोजना प्रमुख, एनएमएल तलईपल्ली ने की। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के प्रमुख एवं परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न समाचार पत्रों एवं मीडिया संस्थानों से आए पत्रकारों ने भाग लिया। बैठक के दौरान परियोजना की खनन गतिविधियों, विकास कार्यों एवं समग्र प्रगति से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की गई।

इस दौरान बताया गया कि परियोजना ने इस वित्तीय वर्ष अब तक 11 मिलियन मीट्रिक टन (1 करोड़ 10 लाख टन) से अधिक कोयले का उत्पादन एवं प्रेषण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वहीं, एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड 45 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य की ओर अग्रसर है। साथ ही, तलईपल्ली परियोजना द्वारा अब तक 59 करोड़ रुपये से अधिक राशि सामुदायिक विकास कार्यों पर व्यय की जा चुकी है।

पत्रकारों ने विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे, जिनमें प्रासंगिक तेल संकट से लेकर भविष्य कि चुनौतियों के बारे में भी चर्चा हुई, परियोजना प्रबंधन द्वारा सभी सवालों संतोषजनक उत्तर दिया गया। इस संवाद से मीडिया और परियोजना के बीच बेहतर समझ एवं पारदर्शिता को बढ़ावा मिला। प्रबंधन ने एनएमएल तलईपल्ली की पारदर्शिता, जवाबदेही और मीडिया के साथ सुदृढ़ संवाद की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

एनटीपीसी तिलाईपाली के ईडी अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि 11.5 मिलियन मैट्रिक टन उत्पादन कर रहा है। जब यह फूल केपिसिटी पर पहुंचेगा तब 25 मिलियन मैट्रिक टन उत्पादन करेगा। वर्तमान समय में चल रहे युद्ध को लेकर उन्होंने कहा कि कोयले की कीमत निर्धारित करने का काम कोल मिनिस्ट्री करती है। हम इसके उत्पादन के लिये जो लगने वाले जो खर्च है, उसमें से मूलभूत लगभग 40 प्रतिशत डीजल का पैसा आ जाता है।

60 दिन का स्टाक मौजूद
अखिलेश कुमार सिंह ने बताया की डीजल की कीमत जैसे-जैसे बढ़ेगी उत्पादन का खर्च बढ़ता चला जाएगा। आज की तिथि में जितना आर्डर किया जाता है उसमें करीबन 10 प्रतिशत कटौती आ चुकी है। आने वाले समय में यह कटौती और हुआ तो क्योंकि अमोनियम सेल्फेक्ट अगर नही मिला तो अवश्य ही कोयले का दाम बढ़ सकता है। डीजल की कमी के चलते कोयले का उत्पादन कम हो जाएगा। अभी वर्तमान में 60 दिन का स्टाक हमारे पास मौजूद है। लेकिन जिसके यहां स्टाक नही है उनके लिये अधिक समस्या उत्पन्न हो सकती है।

ग्रीन कोल माइनिंग की तरफ बढ़ता कदम
उन्होंने यह भी बताया कि एनटीपीसी ने यह फैसला किया है कि हम ग्रीन कोल माइनिंग की तरफ जायेंगे, इसमें कोल गैफिकेशन का पायलट प्रोजेक्ट यहां पर आ रहा है, जो पहली बार हम इंडिया में एक्सपीरिमेंट करने जा रहे हैं। अगर यह सक्सेसफुल होता है तो सीन गैस बनेगी और उससे फटलाइजर और जीतनी भी हाईड्रोजन बन सकता है। इसके लिये 10 हजार करोड़ की मंजूरी मिल चुकी है और उस पर काम चल रहा है।

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Author: kakajee

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