लैब्राडोर डाग पर मालिकाना हक को लेकर लेकर चल रहे विवाद डीएनए रिपोर्ट आने के साथ ही थम गया है। प्रदेश का संभवत: पहला मामला है जहां डाग का डीएनए कराया गया था। गुरुवार को डीएनए रिपोर्ट देहात थाने में आ गई। देहात थाना टीआइ अनूप सिंह नैन ने बताया कि लैब्रोडोर डाग कोका के सैंपल का मिलान पचमढ़ी के डाग से हुआ है। इस रिपोर्ट के आधार पर अब लैब्रोडोर डाग कोको का मालिकना हक गोल्डन सिलिकान सिटी निवासी शादाब खान को दिया जाएगा। दिसंबर 2021 में डाग के डीएन सैंपल को हैदराबाद लैब भेजा गया था। मालाखेड़ी निवासी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक कृतिक शिवहरे ने डाग को लेकर दावेदारी जताई थी।
यह है पूरा मामला
19 नवंबर 2020 को डाग को लेकर विवाद देहात थाने पहुंचा था। गोल्डन सिलिकान सिटी निवासी शादाब खान ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका डाग कोको चोरी हो गया था, जिसे मालाखेड़ी के एक स्कूल के पिंजरे में रखा गया है। वहीं दूसरे पक्ष मालाखेड़ी निवासी कृतिक शिवहरे का कहना था कि वह डाग कोको नहीं बल्कि टाइगर है। विवाद को बढ़ता देख देहात थाने के तत्कालीन टीआइ हेमंत श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों को आमने-सामने खड़ा किया था। इस दौरान दोनों पक्षों को आवाज देने के लिए कहा गया था। तब डाग शादाब के बेटे के पास चला गया था।
पुलिस के निर्णय पर ली थी आपत्ति
पुलिस ने शादाब के बेटे को डाग सौंप दिया था, जिसके बाद कृतिक ने आपत्ति ली थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर डाग को वापस कृतिक को सौंप दिया गया था। 20 नवंबर 2020 को पशु चिकित्सकों द्वारा अभिमत लिया गया था जिसके बाद मामला डीएनए जांच तक पहुंच गया।
पचमढ़ी के डाग का लिया सैंपल
पशु चिकित्सकों ने पचमढ़ी के लैब्राडोर डाग बडी का सैंपल डीएनए मिलान के लिए लिया था। विवाद को शांत करने के लिए पुलिस ने डाग का डीएनए जांच कराने का निर्णय लिया था। लैब्राडोर डाग का सैंपल व पचमढ़ी के डॉग का सैंपल जांच के लिए हैदराबाद प्रयोगशाला भेजा गया था।
